Economy
भारत में प्राइवेट निवेश में बड़ा उछाल! CII ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी धीरे-धीरे घटाने की दी सलाह
निजी क्षेत्र का कैपेक्स 67% बढ़कर 7.7 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, उद्योग संगठन ने सरकार के सामने रखा 5-पॉइंट प्लान
भारत में निजी निवेश को लेकर बड़ी सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। उद्योग संगठन CII (Confederation of Indian Industry) के अनुसार देश में प्राइवेट सेक्टर का कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी Capex सितंबर 2025 तक बढ़कर 7.7 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। यह पिछले साल के 4.6 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 67% ज्यादा है।
CII ने इसे भारत की निवेश अर्थव्यवस्था में “मजबूत वापसी” का संकेत बताया है। साथ ही संगठन ने सरकार के सामने पांच अहम सुझाव भी रखे हैं, जिनमें पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी में चरणबद्ध बदलाव की मांग प्रमुख है।
पेट्रोल-डीजल पर क्या बोला CII?
CII का कहना है कि सरकार ने पहले ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज कटौती की थी, जिससे सरकारी खजाने पर बड़ा असर पड़ा।
अब संगठन का सुझाव है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं तो अगले 6 से 9 महीनों में इस राहत को धीरे-धीरे वापस लिया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकार की आय बढ़ेगी और राजकोषीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
उद्योगों के लिए 5-पॉइंट प्लान
CII ने मौजूदा वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए उद्योग जगत के लिए एक विशेष 5-पॉइंट एजेंडा पेश किया है। इसमें—
- MSME कंपनियों को 45 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करना
- आयात पर निर्भरता कम करके घरेलू उत्पादन बढ़ाना
- सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना
- ऊर्जा और ईंधन की खपत 3-5% तक घटाना
- इंटर्नशिप और रोजगार अवसर बढ़ाना
जैसे सुझाव शामिल हैं।
कंपनियों में बढ़ रहा भरोसा
CII की रिपोर्ट के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में क्षमता उपयोग (Capacity Utilisation) भी बढ़ा है। FY26 की तीसरी तिमाही में यह 75.6% तक पहुंच गया, जो पिछले क्वार्टर में 74.3% था।
इसके अलावा नए ऑर्डर्स में भी 10% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं बैंक क्रेडिट ग्रोथ भी दूसरी छमाही में लगभग 14% तक पहुंच गई।
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MSME सेक्टर को मिलेगी राहत
CII ने बड़ी कंपनियों से अपील की है कि वे छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) को समय पर भुगतान करें ताकि उनके वर्किंग कैपिटल पर दबाव कम हो।
इसके लिए TReDS प्लेटफॉर्म और सप्लाई-चेन फाइनेंस का ज्यादा इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

हरित ऊर्जा पर भी जोर
रिपोर्ट में कंपनियों से यह भी कहा गया है कि वे ईंधन और बिजली की खपत कम करने के लिए इलेक्ट्रिक फ्लीट, बेहतर लॉजिस्टिक्स और रिन्यूएबल एनर्जी को तेजी से अपनाएं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में निजी निवेश की यह तेजी आने वाले वर्षों में रोजगार, उत्पादन और आर्थिक विकास को नई गति दे सकती है।
