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Economy

भारत में सिर्फ ₹3 महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, जबकि UAE और US में कीमतों ने तोड़े रिकॉर्ड

वैश्विक तेल संकट के बीच कई देशों में 40% से 90% तक बढ़ीं कीमतें, लेकिन भारत ने 76 दिन तक जनता पर नहीं डाला पूरा बोझ

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Petrol Diesel Price Hike: UAE और US के मुकाबले भारत में क्यों कम बढ़े दाम?

15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद देशभर में इसकी चर्चा तेज हो गई। लंबे समय बाद हुए इस इजाफे ने आम लोगों की जेब पर असर जरूर डाला, लेकिन अगर दुनिया के दूसरे देशों से तुलना करें तो भारत में यह बढ़ोतरी काफी कम मानी जा रही है।

दरअसल, Iran और US के बीच बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz में तेल सप्लाई प्रभावित होने के बाद पूरी दुनिया में ईंधन संकट गहरा गया। यही समुद्री रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल की सप्लाई का मुख्य जरिया माना जाता है। इस संकट के बाद कई देशों ने तुरंत पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक UAE में ईंधन कीमतों में करीब 52% तक उछाल देखा गया, जबकि US में लगभग 44% तक बढ़ोतरी हुई। कुछ देशों में तो हालात इतने बिगड़े कि सरकारों को राशनिंग और इमरजेंसी कंट्रोल तक लागू करने पड़े। वहीं भारत ने करीब 76 दिनों तक कीमतें स्थिर रखीं।

सरकारी तेल कंपनियों को इस दौरान भारी नुकसान उठाना पड़ा। बताया जा रहा है कि हर दिन लगभग 1000 करोड़ का अंडर-रिकवरी बोझ कंपनियां और सरकार मिलकर संभाल रही थीं। फिलहाल पेट्रोल पर करीब 26 प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 82 प्रति लीटर का नुकसान बताया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार की पूरी मार सीधे जनता पर डाल दी जाती, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 200 से 300 प्रतिशत तक बढ़ सकती थीं। इसका सबसे ज्यादा असर किसानों, ट्रक ड्राइवरों, ऑटो चालकों और रोजाना ईंधन पर निर्भर आम लोगों पर पड़ता।

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भारत अपनी जरूरत का करीब 80-85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। सरकार के मुताबिक हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल अरबों डॉलर बढ़ जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि सरकार इस पूरे संकट को घरेलू आर्थिक संकट की बजाय एक “वैश्विक भू-राजनीतिक असर” मान रही है। इसी वजह से अभी तक किसी तरह की राशनिंग लागू नहीं की गई। इसके बजाय लोगों से ईंधन बचाने, गैरजरूरी विदेशी यात्रा कम करने और सोने की खरीद घटाने की अपील की जा रही है।

सरकार का मानना है कि अगर लोग थोड़ी सावधानी बरतें तो विदेशी मुद्रा पर दबाव कम किया जा सकता है। यही वजह है कि अभी भी किसानों को भारी सब्सिडी के साथ सस्ती खाद उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि खेती-किसानी पर असर कम पड़े।

दुनिया के कई देशों में जहां अचानक भारी महंगाई ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं, वहीं भारत ने धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाने की रणनीति अपनाई। मौजूदा ₹3 की बढ़ोतरी कुल कीमत का सिर्फ लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत हिस्सा मानी जा रही है, जो बड़े देशों की तुलना में काफी कम है।

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