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ओला इलेक्ट्रिक का बड़ा दांव: बैटरी और EV बिजनेस में ₹2000 करोड़ निवेश, कंपनी ने बनाया मेगा प्लान
ओला इलेक्ट्रिक अपनी बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिक व्हीकल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए दो प्रमुख सहायक कंपनियों में भारी निवेश करेगी।
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है और इसी बीच ओला इलेक्ट्रिक ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने EV और बैटरी कारोबार को मजबूत करने का फैसला लिया है। कंपनी के बोर्ड ने दो प्रमुख सहायक कंपनियों में कुल ₹2000 करोड़ निवेश को मंजूरी दी है।
यह निवेश ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (OET) और ओला सेल टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (OCT) में किया जाएगा। कंपनी का कहना है कि इस फंडिंग का उद्देश्य इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी निर्माण क्षमता को बढ़ाना है ताकि आने वाले वर्षों में बढ़ती मांग को आसानी से पूरा किया जा सके।
जानकारी के मुताबिक, ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज को ₹1500 करोड़ का निवेश मिलेगा। यह कंपनी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माण, सप्लाई और EV सर्विस नेटवर्क संभालती है। वित्त वर्ष 2024-25 में इस यूनिट का कारोबार ₹4717 करोड़ से अधिक रहा, जो कंपनी के लिए एक मजबूत संकेत माना जा रहा है।
वहीं ओला सेल टेक्नोलॉजीज में ₹500 करोड़ लगाए जाएंगे। यह यूनिट बैटरी सेल और बैटरी पैक निर्माण का काम करती है। खास बात यह है कि इस कंपनी की ग्रोथ बेहद तेज रही है। जहां एक साल पहले इसका कारोबार कुछ करोड़ रुपये तक सीमित था, वहीं अब यह कई गुना बढ़ चुका है।
कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में EV सेक्टर में सबसे बड़ी चुनौती बैटरी सप्लाई और लागत नियंत्रण होगी। इसी वजह से ओला अब बैटरी निर्माण में आत्मनिर्भर बनने पर फोकस कर रही है। इससे कंपनी को सप्लाई चेन मजबूत करने और उत्पादन लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
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मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जो कंपनियां अभी से बैटरी टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश कर रही हैं, उन्हें भविष्य में बड़ा फायदा मिल सकता है।

हालांकि निवेश की खबर के बावजूद शेयर बाजार में ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों पर ज्यादा उत्साह नहीं दिखा और कंपनी का शेयर मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। लेकिन लंबे समय के नजरिए से इसे कंपनी की आक्रामक ग्रोथ रणनीति माना जा रहा है।
ओला इलेक्ट्रिक पहले से ही भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाने की कोशिश कर रही है। अब यह नया निवेश कंपनी को बैटरी टेक्नोलॉजी, उत्पादन क्षमता और EV इकोसिस्टम में और मजबूत बना सकता है।
