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सोना-चांदी की कीमतों में फिलहाल नहीं दिखेगा बड़ा उछाल? US-Iran बातचीत पर टिकी बाजार की नजर

वैश्विक तनाव, डॉलर की चाल और महंगाई के आंकड़ों के बीच सोना-चांदी सीमित दायरे में रह सकते हैं

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सोना-चांदी की कीमतें रहेंगी सीमित दायरे में? जानें क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट | Dainik Diary
अमेरिका-ईरान वार्ता और वैश्विक आर्थिक संकेतकों के बीच सोना-चांदी की कीमतों पर निवेशकों की नजर।

सोना और चांदी की कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि अब विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों की कीमतें एक सीमित दायरे में रह सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता और वैश्विक आर्थिक संकेतक माने जा रहे हैं।

कमोडिटी बाजार के जानकारों के अनुसार निवेशकों की नजर इस हफ्ते चीन, अमेरिका और जर्मनी के महंगाई आंकड़ों के साथ-साथ यूरोजोन और ब्रिटेन की GDP रिपोर्ट पर रहेगी। इन आंकड़ों का सीधा असर सोना और चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है।

MCX पर सोना-चांदी में तेजी

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले सप्ताह सोने के दाम में करीब 1 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। सोना 1,178 रुपये बढ़कर लगभग 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।

वहीं चांदी ने और भी मजबूत प्रदर्शन किया। चांदी की कीमत में 10,985 रुपये यानी करीब 4.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 2.61 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दोनों में मजबूती देखने को मिली। कॉमेक्स गोल्ड लगभग 2 प्रतिशत चढ़ा, जबकि सिल्वर में 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज हुई।

क्यों स्थिर रह सकती हैं कीमतें?

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार फिलहाल किसी बड़े फैसले का इंतजार कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों से निवेशकों की धारणा प्रभावित हो रही है।

अगर दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है, तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग थोड़ी कमजोर पड़ सकती है। वहीं तनाव बढ़ने की स्थिति में निवेशक फिर से गोल्ड की तरफ रुख कर सकते हैं।

इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने भी बुलियन मार्केट को सपोर्ट दिया है।

चांदी पर क्यों है ज्यादा नजर?

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में चांदी सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इसकी वजह इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई से जुड़ी चिंताएं हैं। इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर सेक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है।

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यही कारण है कि पिछले दो हफ्तों से सिल्वर में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी हुई दिखाई दे रही है।

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भारतीय बाजार पर भी असर

भारतीय बाजार में रुपये की चाल, घरेलू महंगाई दर और आयात-निर्यात के आंकड़े भी सोना-चांदी की कीमतों को प्रभावित करेंगे। त्योहारों और शादी के सीजन को देखते हुए आने वाले महीनों में मांग बढ़ सकती है, लेकिन फिलहाल बाजार सतर्क मूड में नजर आ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े दांव लगाने से बचना चाहिए और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

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