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Gold खरीदना बंद नहीं, पुराने गोल्ड का करें इस्तेमाल! Jewellery कंपनियों ने दिया नया सुझाव

बढ़ते गोल्ड इम्पोर्ट और आर्थिक दबाव के बीच ज्वेलरी उद्योग ने सरकार और ग्राहकों से गोल्ड रीसाइक्लिंग व एक्सचेंज को बढ़ावा देने की अपील की

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Gold Recycling पर जोर: ज्वेलरी कंपनियों ने दिया नया सुझाव | Dainik Diary
ज्वेलरी कंपनियों ने नए गोल्ड इम्पोर्ट की बजाय पुराने सोने के रीसाइक्लिंग और एक्सचेंज को बढ़ावा देने की अपील की।

देश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और गोल्ड इम्पोर्ट पर बढ़ते दबाव के बीच अब बड़े ज्वेलरी ब्रांड्स ने एक नया रास्ता सुझाया है। उद्योग से जुड़े प्रमुख कारोबारियों का कहना है कि लोगों को सोना खरीदना पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है, बल्कि पुराने सोने के एक्सचेंज, रीसाइक्लिंग और दोबारा उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

ज्वेलरी कंपनियों का मानना है कि भारत में पहले से मौजूद भारी मात्रा में सोना देश की जरूरतों को काफी हद तक पूरा कर सकता है। इससे नए सोने के आयात पर निर्भरता कम होगी और लाखों लोगों की नौकरियां भी सुरक्षित रहेंगी।

भारत में पड़ा है हजारों टन सोना

सेन्को गोल्ड के CEO सुवंकर सेन ने कहा कि भारत में घरों, मंदिरों और निवेश के रूप में करीब 20,000 टन सोना मौजूद है। यदि इसका एक हिस्सा भी व्यवस्थित तरीके से बाजार में वापस लाया जाए, तो देश को नए गोल्ड इम्पोर्ट की जरूरत काफी कम पड़ सकती है।

उन्होंने कहा कि ज्वेलरी इंडस्ट्री केवल व्यापार नहीं बल्कि लाखों कारीगरों और कलाकारों की रोजी-रोटी का बड़ा स्रोत है। ऐसे में अगर लोग पूरी तरह सोना खरीदना बंद कर देंगे, तो इसका असर रोजगार पर भी पड़ेगा।

पुराने गहनों के एक्सचेंज पर बढ़ रहा जोर

PNG Jewellers के चेयरमैन डॉ. सौरभ गाडगिल ने कहा कि आजकल ज्यादातर ग्राहक पुराने गहनों को एक्सचेंज करके नए डिजाइन खरीदते हैं। ऐसे में गोल्ड रीसाइक्लिंग पहले से ही इंडस्ट्री का अहम हिस्सा बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद लोग अब खरीदारी में अधिक समझदारी दिखा सकते हैं, लेकिन पूरी तरह खरीदारी रोकने की संभावना कम है।

‘Gold4India’ अभियान से बदलने की कोशिश

कल्याण ज्वेलर्स के MD टी. एस. कल्याणरमन ने कहा कि कंपनी का ‘Gold4India’ अभियान सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि लोगों की सोच बदलने की कोशिश है।

उन्होंने कहा कि लोग अब सोने को केवल तिजोरी में रखी संपत्ति के रूप में न देखें, बल्कि उसे देश की अर्थव्यवस्था में दोबारा इस्तेमाल होने वाले संसाधन के रूप में समझें।

उनके मुताबिक, यदि निष्क्रिय पड़े सोने को बाजार में वापस लाया जाए, तो इससे देश की विदेशी मुद्रा बच सकती है और GST से मिलने वाला राजस्व भी मजबूत रहेगा।

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम पर भी चर्चा

मालाबार ग्रुप के चेयरमैन एम. पी. अहमद ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को और आसान बनाने की मांग की है।

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उन्होंने सुझाव दिया कि बैंकों और ज्वेलरी कंपनियों की मदद से एक पारदर्शी सिस्टम बनाया जाए, जिससे लोग आसानी से अपना निष्क्रिय सोना औपचारिक अर्थव्यवस्था में ला सकें।

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क्यों अहम है यह बदलाव?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ताओं में शामिल है। हर साल भारी मात्रा में सोना आयात किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है।

ऐसे में अगर देश के भीतर मौजूद सोने का बेहतर इस्तेमाल किया जाए, तो इससे अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है और आम लोगों की सांस्कृतिक परंपराएं भी प्रभावित नहीं होंगी।