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सीजफायर के बाद भी जंग! इजराइल का लेबनान पर बड़ा हमला, ईरान की जवाबी कार्रवाई से बढ़ा तनाव
अमेरिका-ईरान युद्धविराम के कुछ ही घंटों बाद हालात बेकाबू—डोनाल्ड ट्रंप के सामने अब तीन कठिन विकल्प
मध्य-पूर्व एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुआ सीजफायर जैसे ही लागू हुआ, उसके कुछ घंटों के भीतर ही हालात बिगड़ गए। इजराइल ने लेबनान पर लगभग 100 मिसाइलों से हमला किया, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई। इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
इजराइल की इस सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद ईरान ने भी जवाबी हमला किया। ईरान ने इजराइल के साथ-साथ कुछ खाड़ी देशों की ओर भी मिसाइलें दागीं। इसके अलावा उसने एक बार फिर से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान कर दिया, जो दुनिया के करीब 20% तेल परिवहन का अहम रास्ता है। इससे वैश्विक बाजारों में भी घबराहट बढ़ गई है।
लेबनान बना विवाद की जड़
इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह लेबनान को माना जा रहा है। ईरान लगातार यह मांग करता रहा है कि किसी भी युद्धविराम समझौते में लेबनान को शामिल किया जाए, लेकिन अमेरिका और इजराइल इस पर सहमत नहीं हैं। यही कारण है कि सीजफायर के बावजूद लेबनान में हमले जारी हैं।
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इजराइल का कहना है कि लेबनान में सक्रिय हिज़्बुल्लाह उसके लिए “अस्तित्व का खतरा” है। इजराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनका लक्ष्य ईरान की मिसाइल और परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करना और हिज़्बुल्लाह को जड़ से मिटाना है।
ट्रंप के सामने तीन रास्ते
इस पूरी स्थिति ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को मुश्किल में डाल दिया है। उनके सामने अब तीन विकल्प हैं—
1. युद्ध फिर से शुरू करना:
अगर अमेरिका दोबारा युद्ध में उतरता है, तो इससे पूरे पश्चिम एशिया में संघर्ष और भड़क सकता है। तेल संकट गहराएगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
2. कूटनीति पर भरोसा:
ट्रंप चाहें तो बातचीत के जरिए हालात संभालने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में यह रास्ता आसान नहीं दिखता।
3. इजराइल पर दबाव बनाना:
तीसरा विकल्प यह है कि अमेरिका इजराइल पर दबाव डाले कि वह लेबनान में हमले रोके। हालांकि, दोनों देशों के रिश्तों को देखते हुए यह भी चुनौतीपूर्ण कदम होगा।

सीजफायर पर सवाल
इस घटनाक्रम ने सीजफायर की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि लेबनान में हो रहे हमले “अलग संघर्ष” हैं और यह सीजफायर का हिस्सा नहीं हैं। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के बयान हालात को और उलझा सकते हैं।
वैश्विक असर की आशंका
होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इससे भारत जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा, जो तेल आयात पर निर्भर हैं।
आगे क्या?
मध्य-पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं। एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े युद्ध का रूप ले सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि Donald Trump कौन सा रास्ता चुनते हैं और क्या यह क्षेत्र शांति की ओर बढ़ेगा या फिर एक बड़े संघर्ष की ओर।
