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सीजफायर पर संकट! लेबनान में इजराइली हमलों से फिर भड़क सकती है ईरान-अमेरिका जंग
ट्रंप ने युद्ध रोका, लेकिन नेतन्याहू की कार्रवाई ने बिगाड़े हालात—होर्मुज बंद, दुनिया में बढ़ी चिंता
मध्य-पूर्व में शांति की उम्मीदें एक बार फिर कमजोर पड़ती दिख रही हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हुआ दो हफ्ते का सीजफायर अभी पूरी तरह लागू भी नहीं हो पाया था कि लेबनान में तेज होते इजराइली हमलों ने पूरे समीकरण को हिला दिया। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि यह युद्धविराम अब “टूटने की कगार” पर माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में ईरान के साथ संघर्ष को रोकने के लिए यह समझौता किया था। इस डील को अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने “नाजुक लेकिन जरूरी” बताया था। लेकिन जमीन पर जो हो रहा है, वह इस समझौते के बिल्कुल उलट नजर आता है।
लेबनान में तबाही का मंजर
बुधवार को लेबनान की राजधानी बेरूत समेत कई इलाकों में एक के बाद एक जोरदार धमाके हुए। इजराइल ने दावा किया कि उसने हिज़्बुल्लाह के 100 से ज्यादा ठिकानों को सिर्फ 10 मिनट के अंदर निशाना बनाया।
इन हमलों में रिहायशी इलाकों को भी भारी नुकसान पहुंचा। लेबनान की सिविल डिफेंस के मुताबिक, अब तक 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 1100 से ज्यादा घायल हैं। सबसे ज्यादा नुकसान बेरूत में हुआ, जहां आम नागरिकों को अचानक हुए हमलों का सामना करना पड़ा।
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इजराइल का आरोप है कि हिज़्बुल्लाह नागरिक इलाकों का इस्तेमाल अपने सैन्य ठिकानों के रूप में करता है। हालांकि स्थानीय लोग और अधिकारी इस दावे को खारिज कर रहे हैं।
रणनीतिक पुल भी बना निशाना
इजराइल ने सिर्फ सैन्य ठिकानों पर ही नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया। दक्षिणी लेबनान को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एक अहम पुल भी हमले में तबाह कर दिया गया। यह पुल लितानी नदी पर बना था और राहत कार्यों के लिए बेहद जरूरी माना जाता था।
इस कदम ने साफ कर दिया कि इजराइल अब सिर्फ जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि व्यापक सैन्य दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है।
ईरान की सख्त प्रतिक्रिया
लेबनान में हमलों के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। उसने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जो दुनिया के लगभग 20% तेल के परिवहन का मुख्य रास्ता है।
इस फैसले से वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई है। तेल की कीमतों में उछाल की आशंका बढ़ गई है, जिससे भारत जैसे आयातक देशों की चिंता भी बढ़ी है।

ईरान का साफ कहना है कि जब तक लेबनान में हमले जारी रहेंगे, तब तक शांति की कोई बात नहीं हो सकती।
नेतन्याहू की रणनीति और ट्रंप की चुनौती
इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। उनका कहना है कि हिज़्बुल्लाह और ईरान की सैन्य क्षमताओं को खत्म करना ही इस संघर्ष का अंतिम लक्ष्य है।
वहीं दूसरी ओर Donald Trump के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। उन्होंने जिस सीजफायर को अपनी कूटनीतिक जीत बताया था, वही अब खतरे में पड़ता नजर आ रहा है।
अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो अमेरिका को या तो फिर से युद्ध में उतरना पड़ सकता है या फिर इजराइल पर दबाव बनाकर हमले रुकवाने होंगे।
दुनिया की बढ़ती चिंता
मध्य-पूर्व में यह तनाव सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक असर डाल सकता है। तेल आपूर्ति बाधित होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह संघर्ष एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा।
