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ईरान-अमेरिका वार्ता का दूसरा दौर पाकिस्तान में आज, बड़े चेहरे गायब, क्या बनेगी शांति की राह?
पहले दौर के बाद नई उम्मीदें, लेकिन इस बार वीपी जेडी वेंस और ईरानी नेता गालिबाफ नहीं होंगे शामिल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब एक बार फिर बातचीत की कोशिश तेज हो गई है। दोनों देशों के प्रतिनिधि पाकिस्तान में दूसरे दौर की अहम वार्ता के लिए तैयार हैं। हालांकि इस बार कुछ बड़े चेहरे इस बैठक में शामिल नहीं होंगे, जिससे इस बातचीत की दिशा को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने पुष्टि की है कि अमेरिका के विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner शनिवार को पाकिस्तान के लिए रवाना होंगे। ये दोनों नेता ईरान के प्रतिनिधियों से आमने-सामने बातचीत करेंगे और वहां की स्थिति की रिपोर्ट सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को सौंपेंगे।
पहले दौर के बाद क्या बदला?
गौरतलब है कि 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान में ही पहली बार दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि लंबे समय से चल रहे तनाव में कुछ नरमी आ सकती है। लेकिन बीच में कई मुद्दों पर गतिरोध देखने को मिला।
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अब दूसरे दौर की बातचीत को लेकर नई उम्मीदें हैं, क्योंकि खुद ईरान की तरफ से इस बैठक के लिए पहल की गई है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने हाल ही में पाकिस्तान का दौरा “समय के हिसाब से बेहद अहम” बताया था।
बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी क्यों?
इस बार सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरानी संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। ये दोनों पहले दौर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी बातचीत को थोड़ा सीमित कर सकती है, लेकिन इससे पर्दे के पीछे चल रही कूटनीति को भी बल मिल सकता है। कई बार बड़े फैसले ऐसे ही छोटे स्तर की बैठकों में तैयार किए जाते हैं।

पाकिस्तान क्यों बना मंच?
यह भी दिलचस्प है कि इन महत्वपूर्ण वार्ताओं के लिए Pakistan को चुना गया है। पिछले कुछ समय से पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान की यह भूमिका उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकती है। साथ ही यह अमेरिका और ईरान दोनों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने की रणनीति का हिस्सा भी है।
क्या निकल सकता है समाधान?
दूसरे दौर की इस वार्ता से कोई बड़ा समझौता निकलना अभी तय नहीं है, लेकिन यह बातचीत भविष्य के लिए रास्ता जरूर साफ कर सकती है। खासतौर पर परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद गहरे हैं।
फिलहाल दुनिया की नजर इस बैठक पर टिकी है। अगर यहां से सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो आने वाले समय में बड़े स्तर की वार्ताओं का रास्ता खुल सकता है।
