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दुनिया में पहली बार: UAE 2028 तक आधी सरकार चलाएगा Agentic AI से
AI अब सिर्फ टूल नहीं, “एक्जीक्यूटिव पार्टनर” बनेगा—सरकारी फैसले, सेवाएं और ऑपरेशन होंगे तेज़ और स्मार्ट
तकनीक की दुनिया में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए United Arab Emirates (UAE) ने घोषणा की है कि वह 2028 तक अपनी 50% सरकारी सेवाओं और कार्यों को Agentic AI के जरिए संचालित करेगा। अगर यह योजना सफल होती है, तो UAE ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी पहल की जानकारी UAE के प्रधानमंत्री Sheikh Mohammed bin Rashid Al Maktoum ने दी। उन्होंने बताया कि यह नया मॉडल सरकार के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल देगा।
AI अब “सहायक” नहीं, बनेगा “निर्णय लेने वाला”
Sheikh Mohammed के अनुसार, अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल एक सहायक टूल नहीं रहेगा, बल्कि एक “executive partner” की भूमिका निभाएगा। इसका मतलब है कि AI सिस्टम खुद डेटा का विश्लेषण करेगा, निर्णय लेगा, उन्हें लागू करेगा और समय के साथ खुद को बेहतर भी बनाएगा।
यह तकनीक सरकारी सेवाओं को तेज़, सटीक और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी। उदाहरण के तौर पर, पासपोर्ट, हेल्थ सर्विस, ट्रैफिक मैनेजमेंट और नागरिक शिकायतों के समाधान जैसे काम पहले से कहीं ज्यादा तेजी से हो सकेंगे।
कर्मचारियों को मिलेगा AI ट्रेनिंग
इस बदलाव के साथ ही UAE सरकार अपने सभी कर्मचारियों को AI टूल्स में प्रशिक्षित करेगी। उद्देश्य है कि देश के पास दुनिया की सबसे मजबूत AI-ड्रिवन गवर्नेंस क्षमता हो।
इस परियोजना की निगरानी Sheikh Mansour bin Zayed Al Nahyan करेंगे, जबकि इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी एक विशेष टास्कफोर्स को दी गई है, जिसकी अगुवाई Mohammad Al Gergawi करेंगे।
चरणबद्ध तरीके से होगा लागू
सरकार इस मॉडल को एक साथ लागू नहीं करेगी, बल्कि इसे चरणों में विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी विभागों में शुरू किया जाएगा। हर चरण के बाद इसके परिणामों का मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि किसी भी समस्या को समय रहते ठीक किया जा सके।

दुनिया के लिए बनेगा उदाहरण
यह कदम केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि गवर्नेंस के पूरे मॉडल को बदलने की दिशा में एक बड़ा प्रयोग है। UAE का लक्ष्य है कि वह एक ऐसी सरकार बनाए जो तेज, जिम्मेदार और नागरिकों के लिए अधिक उपयोगी हो।
Sheikh Mohammed ने अपने संदेश में साफ किया कि इस पूरे बदलाव का मूल सिद्धांत वही रहेगा—“People First” यानी हर निर्णय और तकनीक का केंद्र आम नागरिक ही होगा।
अगर यह मॉडल सफल होता है, तो आने वाले समय में अन्य देश भी इसी तरह की AI-आधारित शासन प्रणाली अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
