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ईरान ने खुद दिखाई अपनी ‘मिसाइल सिटी’ और उसी वीडियो ने दे दिया दुश्मन को निशाना
मार्च 2025 में गर्व से बनाया प्रचार वीडियो, फरवरी 2026 में वही बेस़ बने बमबारी का पहला टारगेट — यह है ईरान की सबसे महंगी भूल की पूरी कहानी।
नई दिल्ली। कहते हैं कि घमंड इंसान को अंधा कर देता है। और कभी-कभी यही अंधापन उसे खुद अपने दुश्मन का काम आसान कर देता है।
मार्च 2025 की बात है। ईरान के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी — चीफ ऑफ स्टाफ जनरल Mohammad Bagheri और IRGC एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल Amir Ali Hajizadeh — एक विशाल भूमिगत सुरंग में गोल्फ कार्ट पर सवार होकर घूम रहे थे। चारों तरफ हज़ारों मिसाइलें सजी थीं। कैमरा चल रहा था। और यह सब दुनिया को दिखाने के लिए था।
26 मार्च 2025 को ईरानी मीडिया ने एक वीडियो जारी किया जिसमें दोनों शीर्ष कमांडर एक नई विशाल भूमिगत “मिसाइल सिटी” का निरीक्षण करते दिखे। इस सुरंग में Ghadr-H, Emad, Khaibar Shekan, Sejjil और Haj Qassem जैसी उन्नत मिसाइलें लदी गाड़ियों की कतारें थीं।
यह ईरान का शक्ति प्रदर्शन था। एक संदेश था अमेरिका और इज़रायल को — “हम ज़मीन के नीचे हैं, तुम हमें छू नहीं सकते।”
लेकिन ठीक एक साल बाद, यही वीडियो उनके खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बन गया।
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“जो दिखाया, वही निशाना बना”
2025 में ईरान ने एक के बाद एक कई “मिसाइल सिटी” के वीडियो जारी किए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह इसलिए किया गया क्योंकि 2024 में इज़रायल ने ज़मीन के ऊपर के ठिकानों को आसानी से तबाह कर दिया था — तो ईरान दुनिया को यह दिखाना चाहता था कि उसकी असली ताक़त ज़मीन के नीचे सुरक्षित है।
लेकिन इन्हीं वीडियो में वो सब कुछ था जो एक खुफिया एजेंसी को चाहिए होता है — सुरंगों का ढांचा, मिसाइलों के प्रकार, लॉन्चरों की तैनाती, और सबसे ज़रूरी — बाहर निकलने के रास्ते।
सैन्य विशेषज्ञों ने उस वक्त भी चेताया था कि इन भूमिगत सुविधाओं की सबसे बड़ी कमज़ोरी उनके प्रवेश द्वार हैं। इन्हें सील करने भर से अंदर की सारी मिसाइलें बेकार हो जाती हैं — नष्ट करने की ज़रूरत भी नहीं।
यह वैसा ही है जैसे कोई बैंक का मैनेजर खुद पूरे शहर को तिजोरी का नक्शा दिखाए और फिर सोए कि उसकी तिजोरी सुरक्षित है।
500 मीटर गहराई — फिर भी बेपर्दा
यह सुविधा पहाड़ के 500 मीटर नीचे बनी थी। इसमें Kheibar Shekan जैसी मिसाइलें थीं जो 1,450 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं और कुछ ही मिनटों में लॉन्च हो सकती हैं।
लेकिन 500 मीटर की गहराई तब बेकार हो जाती है जब ऊपर का दरवाज़ा बंद कर दिया जाए।
मार्च 2026 तक अमेरिकी और इज़रायली संयुक्त बलों ने ईरान पर “एयर डॉमिनेंस” हासिल कर ली — यानी वे ईरान के किसी भी कोने में बिना रुकावट हमला कर सकते थे।

जब बंकर बना कब्र
अमेरिका के B-2 स्टेल्थ बमवर्षक विमानों ने सीधे इन्हीं भूमिगत सुरंगों के मुहानों को निशाना बनाया। भारी बमों से सुरंगों के प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए — अंदर की मिसाइलें ज़िंदा तो रहीं, लेकिन बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं बचा।
सैटेलाइट तस्वीरों में Najafabad, Esfahan के पास एक मिसाइल बेस पर बंकर-बस्टर बमों के तीन स्पष्ट निशान दिखे। Yazd और Bandar Abbas के पास भी इसी तरह के हमले हुए।
ताक़त का प्रदर्शन या जासूसी का निमंत्रण?
यह सवाल आज दुनिया के हर सैन्य विशेषज्ञ के मन में है।
IRGC कमांडर हाजीज़ादेह ने एक बार कहा था — “अगर दुश्मन ने गलती की, तो यह मिसाइल बेस धरती की गहराई से ज्वालामुखी की तरह फटेंगे।”
लेकिन असल में हुआ उल्टा। जो ज्वालामुखी “फटने” वाला था, उसका मुँह ही बंद कर दिया गया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल Brad Cooper ने 5 मार्च को बताया कि ईरान के बैलेस्टिक मिसाइल हमले युद्ध शुरू होने के बाद से 90 प्रतिशत तक गिर चुके हैं।
एक सबक जो इतिहास देता है
द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी की Maginot Line की याद आती है — फ्रांस ने अरबों खर्च कर एक अभेद्य दीवार बनाई, लेकिन जर्मनी उसके चारों तरफ से निकल गया। ईरान की “मिसाइल सिटी” भी कुछ वैसी ही कहानी बन गई।
जब आप अपनी ताक़त का प्रचार करते हैं, तो आप अपनी कमज़ोरी का नक्शा भी दे देते हैं।
ईरान ने वो वीडियो बनाया था दुनिया को डराने के लिए। उसे नहीं पता था कि वही वीडियो एक दिन उसके सबसे बड़े दुश्मन की “टारगेट लिस्ट” बन जाएगा।
