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हर महीने $4.5 बिलियन का खेल: आखिर क्यों होर्मुज़ पर ‘हुकूमत’ चाहता है ईरान?

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होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरते तेल टैंकर, इसी रास्ते पर नियंत्रण को लेकर बढ़ रहा वैश्विक तनाव
होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरते तेल टैंकर, इसी रास्ते पर नियंत्रण को लेकर बढ़ रहा वैश्विक तनाव

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक सवाल तेजी से उभर रहा है— आखिर Iran क्यों Strait of Hormuz पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है?

इस सवाल का जवाब सिर्फ राजनीति में नहीं, बल्कि अरबों डॉलर की कमाई में छिपा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर ईरान इस समुद्री मार्ग पर प्रभावी नियंत्रण हासिल कर लेता है, तो वह हर महीने करीब 4.5 बिलियन डॉलर (लगभग 37,000 करोड़ रुपये) तक की अप्रत्यक्ष आर्थिक ताकत हासिल कर सकता है।

क्या है होर्मुज़ जलडमरूमध्य?

होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। यह खाड़ी क्षेत्र को खुले समुद्र से जोड़ता है और यहां से दुनिया के कुल तेल सप्लाई का लगभग 20% गुजरता है।

यानी अगर इस रास्ते पर कोई भी देश प्रभाव जमाता है, तो वह वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करने की ताकत रखता है।

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$4.5 बिलियन का ‘जैकपॉट’ कैसे?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रकम सीधे टैक्स या शुल्क के रूप में नहीं, बल्कि नियंत्रण और प्रभाव से जुड़ी है।

अगर ईरान यहां अपनी पकड़ मजबूत करता है, तो:

  • वह तेल टैंकरों की आवाजाही पर निगरानी रख सकता है
  • जरूरत पड़ने पर दबाव बनाकर कीमतों को प्रभावित कर सकता है
  • वैश्विक बाजार में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ा सकता है

यानी यह सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक शक्ति का खेल है।

क्यों बढ़ रहा है तनाव?

हाल के दिनों में United States और उसके सहयोगी देशों ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है। दूसरी ओर, ईरान भी बार-बार यह संकेत दे रहा है कि वह इस क्षेत्र में अपनी भूमिका को कम नहीं होने देगा।

इस खींचतान के कारण कई बार जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरते तेल टैंकर, इसी रास्ते पर नियंत्रण को लेकर बढ़ रहा वैश्विक तनाव


दुनिया पर क्या असर?

अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

  • तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं
  • भारत जैसे देशों के आयात बिल में इजाफा हो सकता है
  • वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है

भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे हालात में सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक हो सकता है।

क्या आगे बढ़ेगा टकराव?

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का लक्ष्य सिर्फ आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना भी है।

हालांकि, इस रास्ते पर किसी एक देश का पूर्ण नियंत्रण संभव नहीं है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है। लेकिन इसके बावजूद, यहां पर प्रभाव बनाए रखना ही सबसे बड़ा गेम बन चुका है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कूटनीति इस तनाव को कम कर पाएगी या होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के अगले बड़े संकट का केंद्र बनेगा।