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गोलियों के साए में भी हिम्मत नहीं हारी भारतीय टैंकर ने हॉर्मुज पार कर रचा नया रिकॉर्ड
जहां दो जहाज़ों को लौटना पड़ा, वहीं ‘देश गरिमा’ 31 भारतीय नाविकों के साथ सुरक्षित आगे बढ़ा
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर सुर्खियों में है। जहां एक तरफ फायरिंग की घटनाओं के कारण कई जहाज़ों को बीच रास्ते से लौटना पड़ा, वहीं दूसरी ओर एक भारतीय टैंकर ने हिम्मत दिखाते हुए इस खतरनाक रास्ते को सफलतापूर्वक पार कर लिया।
यह कहानी सिर्फ एक जहाज़ की नहीं, बल्कि उन भारतीय नाविकों के साहस की है जो हर दिन जोखिम भरे हालात में भी अपने कर्तव्य को निभाते हैं।
‘देश गरिमा’ ने दिखाई हिम्मत
भारतीय झंडे वाला कच्चे तेल का टैंकर ‘देश गरिमा’ 18 अप्रैल को हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहा। इस जहाज़ पर कुल 31 भारतीय नाविक सवार थे। अब यह जहाज़ 22 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, यह मार्च की शुरुआत के बाद से इस संवेदनशील मार्ग को पार करने वाला 10वां भारतीय जहाज़ है। ऐसे समय में जब खतरा लगातार बना हुआ है, यह एक बड़ी राहत की खबर मानी जा रही है।
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दूसरी तरफ क्यों लौटे जहाज़?
जहां ‘देश गरिमा’ आगे बढ़ा, वहीं दो अन्य भारतीय जहाज़ों—‘समनार हेराड’ (Samnar Herad) और ‘जग अर्नव’ (Jag Arnav)—को अचानक हुई फायरिंग के कारण वापस लौटना पड़ा।
इन जहाज़ों ने हॉर्मुज से गुजरते समय गोलीबारी की सूचना दी, जिसके बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें फारस की खाड़ी की ओर वापस जाना पड़ा। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी चालक दल के सदस्य को चोट नहीं आई।
और भी जहाज़ों ने बदला रास्ता
सिर्फ यही नहीं, मरीन ट्रैफिक डेटा के अनुसार ‘देश वैभव’ और ‘देश विभोर’ नाम के दो अन्य भारतीय टैंकरों ने भी इस खतरे को देखते हुए अपना रास्ता बदल लिया।
इस समय फारस की खाड़ी में करीब 14 भारतीय झंडे वाले जहाज़ मौजूद हैं, जो हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
क्यों इतना अहम है हॉर्मुज?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग माना जाता है। दुनिया भर में सप्लाई होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
ऐसे में यहां किसी भी तरह की फायरिंग या तनाव न सिर्फ जहाज़ों के लिए खतरा बनता है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर भी सीधा असर डालता है।

भारत ने जताई चिंता
इन घटनाओं के बाद भारत सरकार ने ईरान के सामने इस मुद्दे को उठाया है। नई दिल्ली ने साफ कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर इस तरह की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं और इससे व्यापारिक जहाज़ों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
नाविकों की असली कहानी
जब हम खबरों में सिर्फ जहाज़ों के नाम सुनते हैं, तब शायद हमें अंदाजा नहीं होता कि उन जहाज़ों पर सवार लोग किन परिस्थितियों से गुजरते हैं।
‘देश गरिमा’ के 31 नाविकों ने जिस साहस के साथ इस खतरनाक रास्ते को पार किया, वह अपने आप में एक प्रेरणा है। वहीं दूसरी ओर, जिन जहाज़ों को वापस लौटना पड़ा, उनके चालक दल ने भी समझदारी दिखाते हुए अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
आगे क्या?
हॉर्मुज में स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या तनाव कम होता है या फिर और जहाज़ों को इसी तरह के खतरे का सामना करना पड़ेगा।
फिलहाल, ‘देश गरिमा’ की सुरक्षित यात्रा ने यह जरूर दिखा दिया है कि मुश्किल हालात में भी हिम्मत और समझदारी से रास्ता निकाला जा सकता है।
