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ईरान से जंग के लिए पेंटागन ने माँगे ₹16 लाख करोड़ यह रकम ईरान की पूरी GDP का आधा है

रक्षा मंत्री हेग्सेथ बोले — “बुरे लोगों को मारने में पैसा लगता है”; अमेरिका पर पहले से ₹3,200 लाख करोड़ का कर्ज़, फिर भी जंग जारी

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पेंटागन ने माँगे ₹16 लाख करोड़ — ईरान जंग का बजट ईरान की GDP का 50% | Dainik Diary
पेंटागन का 200 अरब डॉलर का माँगपत्र — ईरान जंग की कीमत जो अमेरिकी करदाता चुकाएगा; रक्षा मंत्री हेग्सेथ बोले, "बुरे लोगों को मारने में खर्चा होता है।"

नई दिल्ली/वाशिंगटन। कल्पना कीजिए कि आपके पड़ोसी से झगड़े में आप इतना पैसा लगा दें जितना उसकी पूरी सालाना कमाई का आधा हो। यही कर रहा है अमेरिका — ईरान के साथ अपनी इस जंग में। पेंटागन ने अमेरिकी संसद से 200 अरब डॉलर यानी करीब 16 लाख करोड़ रुपये की माँग की है — और यह रकम ईरान की पूरी GDP का लगभग 50 प्रतिशत है।

यह आँकड़ा सुनकर दिमाग चकरा जाता है। लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ ने जब इस पर सवाल पूछा गया तो उनका जवाब था — “बुरे लोगों को मारने में पैसा लगता है।”

तीन हफ्ते की जंग, 12 अरब डॉलर खर्च — और अब 200 अरब की माँग

व्हाइट हाउस के अनुसार अमेरिकी सैन्य अभियान — जिसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया है — अब तक 12 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत थी। अब पेंटागन ने व्हाइट हाउस से कहा है कि वह कांग्रेस के सामने 200 अरब डॉलर से ज्यादा का बजट प्रस्ताव रखे — ताकि ईरान की जंग को आगे बढ़ाया जा सके।

यह रकम उन हथियारों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए है जो अमेरिका और इज़राइल ने हजारों ठिकानों पर हमले में खर्च कर दिए हैं। सरल भाषा में — बम और मिसाइलें इतनी तेज़ी से फेंकी जा रही हैं कि गोदाम खाली होने लगे हैं, और अब उन्हें भरने के लिए पैसा चाहिए।

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“200 अरब डॉलर — यह रकम अमेरिका को छोड़कर दुनिया के किसी भी देश के पूरे रक्षा बजट से ज्यादा है”

एक रिपोर्ट के मुताबिक 200 अरब डॉलर अमेरिका को छोड़कर धरती पर किसी भी अन्य देश के सालाना रक्षा खर्च से अधिक है। यानी अमेरिका सिर्फ इस एक जंग के लिए उतना पैसा माँग रहा है जितना चीन, रूस, भारत, फ्रांस और ब्रिटेन मिलकर अपनी पूरी सेनाओं पर खर्च नहीं करते।

तुलना के तौर पर समझें — भारत का पूरा रक्षा बजट 2025-26 में करीब 75 अरब डॉलर है। अमेरिका सिर्फ ईरान की जंग के लिए उससे तीन गुना ज्यादा माँग रहा है।

कर्ज़ में डूबा अमेरिका, फिर भी जंग जारी

अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज़ अब 39 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। ट्रंप ने चुनाव प्रचार में सरकारी खर्च घटाने का वादा किया था — लेकिन अब वही ट्रंप एक जंग के लिए 200 अरब डॉलर की माँग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि यूक्रेन की जंग में अमेरिकी कांग्रेस ने दिसंबर 2024 तक करीब 188 अरब डॉलर मंजूर किए थे। ईरान की जंग के लिए माँगी गई रकम उससे भी ज्यादा है — और वह जंग वर्षों तक चली थी। यह जंग अभी तीन हफ्ते पुरानी है।

पेंटागन ने माँगे ₹16 लाख करोड़ — ईरान जंग का बजट ईरान की GDP का 50% | Dainik Diary


कांग्रेस में विरोध, अपनों में भी असंतोष

पेंटागन का यह बजट अनुरोध कांग्रेस में सवालों का सामना करेगा — डेमोक्रेट और कुछ रिपब्लिकन दोनों इस जंग के विरोधी हैं रिपब्लिकन सीनेटर रोजर मार्शल ने इसे “थोड़ा ज्यादा” बताते हुए कहा कि पेंटागन को यह बताना होगा कि यह पैसा कहाँ जाएगा — क्योंकि उन्हें पहले से एक ट्रिलियन डॉलर का बजट मिला हुआ है।

हाउस स्पीकर माइक जॉनसन का मानना है कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें और नौसेना को तबाह कर दिया है और यह ऑपरेशन जल्द समाप्त हो जाएगा। लेकिन पेंटागन का 200 अरब का बजट अनुरोध कुछ और ही कहानी बयान करता है।

आम अमेरिकी क्या सोच रहा है?

सड़क पर खड़े किसी भी अमेरिकी नागरिक से पूछिए — उसका स्वास्थ्य बीमा महँगा है, बच्चों की पढ़ाई का कर्ज़ है, घर का किराया आसमान छू रहा है। और सरकार 200 अरब डॉलर एक ऐसी जंग पर खर्च करना चाहती है जिसे खुद अमेरिका के कई नेता “ज़रूरी नहीं” बता रहे हैं।

यही वह सवाल है जो आने वाले दिनों में वाशिंगटन की राजनीति को हिलाकर रख सकता है।