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रूस ने ईरान को दी अमेरिकी सेना की गुप्त जानकारी अब यह जंग सिर्फ दो देशों की नहीं रही
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के हवाले से खुलासा — रूस अपने सैटेलाइट नेटवर्क से अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों की लोकेशन ईरान को भेज रहा है, चीन की भूमिका पर भी सवाल।
वाशिंगटन/मॉस्को — मध्य-पूर्व में अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हमलों के बाद जो जंग छिड़ी है, वह अब धीरे-धीरे एक बड़े वैश्विक टकराव का रूप लेती दिख रही है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक रूस इस युद्ध में चुपचाप ईरान की मदद कर रहा है — और यह मदद बंदूकों या बमों से नहीं, बल्कि जानकारी से हो रही है।
सैटेलाइट से मिल रही है अमेरिकी सेना की लोकेशन
रूस ईरान को अमेरिकी सैनिकों, युद्धपोतों और विमानों की लोकेशन और उनकी हलचल की जानकारी मुहैया करा रहा है — यह बात अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों से परिचित कई सूत्रों ने बताई है। यह पहला संकेत है कि मॉस्को इस युद्ध में सक्रिय रूप से दखल देने की कोशिश कर रहा है। बतया जा रहा है कि रूस ने अपने परिष्कृत सैटेलाइट नेटवर्क से ली गई तस्वीरें ईरान के साथ साझा की हैं।
सरल भाषा में समझें तो — जैसे किसी क्रिकेट मैच में एक तीसरा खिलाड़ी दूसरी टीम को बता दे कि विरोधी गेंदबाज़ अगली बॉल कहाँ फेंकने वाला है। यही काम रूस ईरान के लिए कर रहा है।
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“यह तो बदला है” — अमेरिकी अधिकारी का बेबाक बयान
एक अमेरिकी अधिकारी ने सीधे कहा — “रूस जानता है कि हम यूक्रेन को खुफिया जानकारी देते रहे हैं। मुझे लगता है वे बदला लेकर खुश हैं।” यानी यह महज़ सैन्य सहयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी भू-राजनीतिक चाल है। एक अधिकारी ने इस जानकारी साझा करने को “काफी व्यापक प्रयास” बताया।
रूस का दोहरा खेल*
दिलचस्प बात यह है कि रूस सार्वजनिक तौर पर इस संघर्ष को रोकने की मांग कर रहा है और अमेरिका-इज़राइल के हमलों को “अकारण सशस्त्र आक्रामकता” बता रहा है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव राजनयिक समाधान की बात कर रहे हैं — लेकिन परदे के पीछे रूसी सैटेलाइट ईरान की मदद कर रहे हैं। यह वही पुरानी रूसी कूटनीति है — मुँह से शांति की बात और हाथ से युद्ध की तैयारी।
चीन की ‘सतर्क दूरी’
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को यह भी संकेत मिले हैं कि चीन ईरान को वित्तीय सहायता, स्पेयर पार्ट्स और मिसाइल कंपोनेंट देने की तैयारी कर रहा हो सकता है — हालाँकि अभी तक बीजिंग सीधे इस युद्ध से दूर रहा है। एक सूत्र ने बताया कि चीन ज़्यादा सतर्क है क्योंकि यह युद्ध उसकी ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा है। चीन ईरानी तेल पर भारी निर्भर है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य अवरुद्ध होने से उसे भारी नुकसान होगा।

रूस-ईरान की दोस्ती कोई नई बात नहीं
रूस और ईरान ने 2025 की शुरुआत में एक बड़ी रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें सैन्य और रक्षा सहयोग को और गहरा किया गया। दोनों देशों ने फरवरी के आखिर में — यानी अमेरिका-इज़राइल के हमले से महज़ एक हफ्ते पहले — हिंद महासागर में संयुक्त सैन्य अभ्यास भी किया था। इस के अलावा यूक्रेन पर हमले में ईरान ने रूस को वही शाहेद ड्रोन दिए थे जो अब मध्य-पूर्व में तबाही मचा रहे हैं — यानी यह दोस्ती पुरानी और गहरी है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री का अजीब दावा
इस सब के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ ने कहा कि रूस और चीन इस युद्ध में “कोई बड़ा फर्क नहीं डाल रहे।” उनका कहना था कि “वे वास्तव में यहाँ कोई भूमिका नहीं निभा रहे।” लेकिन खुद उनकी ही सरकार की खुफिया रिपोर्टें इसके उलट कहानी बयान कर रही हैं।
यह जंग अब सिर्फ अमेरिका-इज़राइल बनाम ईरान की नहीं रही — इसके धागे मॉस्को तक जा पहुँचे हैं। और दुनिया की बाकी बड़ी ताकतें भी करीब से इस खेल को देख रही हैं।
