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“300 साल में कभी पहले नहीं लड़े अब भी हम नहीं झुकेंगे”: ईरान की खुली चेतावनी
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी बोले — अमेरिका और इजरायल को उनकी गलत सोच का पछतावा होगा, हम लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं
मध्य पूर्व में धमाकों की आवाज़ें जब तक थमी नहीं थीं, तब तक तेहरान से एक ऐसा बयान आया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया।
ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारिजानी ने सोशल मीडिया पर लिखा — “पिछले 300 वर्षों में ईरान ने कभी भी किसी युद्ध की शुरुआत नहीं की। हमारी सेना ने हमेशा केवल आत्मरक्षा में कदम उठाया है। हम किसी भी कीमत पर अपनी 6,000 वर्ष पुरानी सभ्यता की रक्षा करेंगे — और दुश्मनों को उनके गलत आकलन पर पछताना पड़ेगा।”
यह बयान तब आया जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर ताजा हवाई हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। ईरान के रेड क्रिसेंट के अनुसार, इन हमलों में 550 से अधिक ईरानी नागरिकों की जान गई।
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कौन हैं अली लारिजानी?
लारिजानी कोई साधारण नेता नहीं हैं। वे ईरान के उस परिवार से आते हैं जिसे टाइम मैगज़ीन ने एक बार “ईरान के केनेडी” कहा था। उन्होंने तेहरान विश्वविद्यालय से पश्चिमी दर्शनशास्त्र में पीएचडी की है — थीसिस जर्मन दार्शनिक इमानुएल कांट पर। एक ऐसा शख्स जो किताबें लिखता है, कूटनीति करता है, और जरूरत पड़ने पर युद्ध की भाषा भी बोलता है।
अगस्त 2025 में उन्हें ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का प्रमुख नियुक्त किया था। खामेनेई की मृत्यु के बाद, लारिजानी अब ईरान के सबसे ताकतवर व्यक्ति माने जा रहे हैं।
युद्ध की यह स्थिति कैसे यहाँ तक पहुँची?
कहानी की जड़ें 2018 में हैं, जब ट्रंप ने JCPOA परमाणु समझौते को तोड़ा और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए। 2025 में जब ट्रंप दोबारा सत्ता में आए तो उन्होंने नई बातचीत शुरू की, लेकिन वह भी नतीजे के बिना खत्म हो गई। जून 2025 में इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया, जिसे अमेरिका का भी समर्थन मिला। उसके बाद से दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ता ही गया।
फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों ने मध्य पूर्व को एक पूर्ण युद्ध की दहलीज पर ला खड़ा किया।

ईरान की “लंबी लड़ाई” की बात — कितनी असली?
लारिजानी ने साफ कहा — “अमेरिका के विपरीत, ईरान एक लंबे युद्ध के लिए तैयार है।” यह कोई खाली धमकी नहीं है। ईरान ने दुबई के पास शारजाह में हमले किए, कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज़रानी को खतरे में डाल दिया — जिससे दुनियाभर में तेल की कीमतें 25% से ज्यादा उछल गईं।
उधर अमेरिका के छह सैनिकों की मौत हो चुकी है। कुवैत ने गलती से अमेरिका के तीन लड़ाकू विमान मार गिराए। दुबई और बहरीन में भी ईरानी हमलों की खबरें आईं। यानी यह युद्ध अब सिर्फ ईरान की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा।
भारत पर क्या असर?
भारत के लिए यह संकट सिर्फ दूर देश की खबर नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत का एक बड़ा हिस्सा तेल आयात होता है। चाबहार बंदरगाह, जिससे भारत अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जुड़ना चाहता है, वो भी इस आग की चपेट में आ सकता है। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय प्रवासी रहते हैं जो अभी असुरक्षित हैं।
सरकार ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
आगे क्या?
लारिजानी ने अमेरिका से बातचीत की संभावना पूरी तरह नकार दी है। उन्होंने कहा — “हम अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेंगे।” ट्रंप का कहना है कि हमले चार से पाँच हफ्ते तक जारी रह सकते हैं।
दुनिया अभी एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ एक गलत कदम पूरे क्षेत्र को आग में झोंक सकता है। 300 साल की जो शांति का दावा ईरान करता है — वो अब कहानी बन चुकी है। आगे क्या होगा, यह वक्त ही बताएगा।
