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ईरान पर अमेरिका-इजरायल का कहर 555 मौतें, 168 मासूम बच्चियाँ भी शामिल
131 शहर तबाह, सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत, और अब पूरा मध्य पूर्व युद्ध की आग में — दुनिया का सबसे खतरनाक हफ्ता
जब किसी देश के आसमान से लगातार मिसाइलें बरसती हैं, जब स्कूल तक सुरक्षित नहीं रहते — तो समझ लीजिए कि इतिहास करवट ले रहा है।
28 फरवरी 2026 की वो रात ईरान के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। अमेरिका और इजरायल ने एक साथ ईरान पर हमले शुरू किए — और उसके बाद जो हुआ वो पूरी दुनिया देख रही है।
555 मौतें — और गिनती अभी जारी है
ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने बताया कि इन हमलों में अब तक 555 ईरानी नागरिक मारे जा चुके हैं और देश के 131 शहर प्रभावित हुए हैं। राहत और बचाव कार्यों में एक लाख से अधिक कर्मी तैनात हैं और चार लाख स्वयंसेवक स्टैंडबाय पर हैं।
लेकिन इन आंकड़ों में सबसे दर्दनाक खबर थी एक स्कूल की। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, दक्षिण-पूर्वी ईरान के मिनाब शहर में एक प्राथमिक विद्यालय पर सीधा हमला किया गया जिसमें लगभग 168 मासूम बच्चियाँ मारी गईं। यह खबर पढ़कर दिल दहल जाता है।
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खामेनेई की मौत — इतिहास बदल गया
इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के सदस्य भी मारे गए। यह ईरान के इतिहास में एक ऐसा मोड़ है जिसकी कल्पना भी कुछ साल पहले नहीं की जा सकती थी। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद पहली बार देश का सर्वोच्च नेता इस तरह मारा गया।
इजरायली वायुसेना ने कहा कि उसने ईरान के पश्चिमी और मध्य भाग में 500 सैन्य ठिकानों पर हमले किए — इसके लिए करीब 200 लड़ाकू विमान भेजे गए, जो इजरायली इतिहास का सबसे बड़ा हवाई अभियान था।
ईरान का पलटवार — पूरा खाड़ी क्षेत्र दहला
ईरान ने भी चुप नहीं बैठा। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के 27 ठिकानों और इजरायल के सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले किए।
कुवैत में अमेरिकी दूतावास परिसर पर हमले हुए। बहरीन की राजधानी मनामा में रिहायशी इमारतों पर ड्रोन गिरे। दुबई, अबु धाबी और दोहा के आसमान पर मिसाइलें रोकी जाती रहीं। खाड़ी देशों के लाखों प्रवासी दहशत में घरों में बंद हो गए।

अमेरिका ने मध्य पूर्व के 14 देशों में अपने नागरिकों को तुरंत वहाँ छोड़ने की चेतावनी जारी की — लेकिन ज्यादातर एयरपोर्ट बंद थे, उड़ानें रद्द हो चुकी थीं। हजारों यात्री दुनियाभर के हवाई अड्डों पर फंसे रहे।
यह जंग कब तक?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह युद्ध करीब चार हफ्ते तक चल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के चार उद्देश्य हैं — ईरान की मिसाइल क्षमता खत्म करना, उसकी नौसेना बर्बाद करना, परमाणु हथियार बनाने से रोकना और आतंकी संगठनों की फंडिंग रोकना।
उधर ईरान के सुरक्षा प्रमुख लारिजानी ने साफ कह दिया — अमेरिका से कोई बातचीत नहीं।
भारत के लिए खतरे की घंटी
भारत के लाखों नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत सरकार ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने और दूतावास से संपर्क बनाए रखने की सलाह दी है।
यह सिर्फ ईरान की जंग नहीं है। यह पूरी दुनिया के लिए एक परीक्षा की घड़ी है।
