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‘पूरा जहाज आग में था…’ ईरान युद्ध के बीच जान जोखिम में डालकर काम कर रहे भारतीय नाविक
अच्छी सैलरी के लिए समुद्र में उतरते हैं हजारों भारतीय युवक, लेकिन मिडिल ईस्ट युद्ध ने बढ़ा दिया खतरा
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब सिर्फ देशों की राजनीति या तेल बाजार तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर उन हजारों भारतीय नाविकों की जिंदगी पर भी पड़ रहा है जो समुद्र में अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं।
भारत दुनिया में merchant shipping यानी व्यापारिक जहाजों पर काम करने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है। साल 2025 में भारत के पास 3.2 लाख से ज्यादा सक्रिय नाविक हैं। बेहतर सैलरी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए हर साल हजारों युवा इस क्षेत्र में जाते हैं, लेकिन अब यह काम पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक हो चुका है।
“मुझे लगा इंजन फट गया…”
राजस्थान के किसान परिवार से आने वाले सुनील पूनिया के लिए समुद्र में नौकरी गरीबी से बाहर निकलने का सपना थी। लेकिन उनका पहला सफर ही जिंदगी का सबसे डरावना अनुभव बन गया।
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सुनील जिस जहाज MV Skylight पर काम कर रहे थे, उस पर ओमान के खासाब पोर्ट के पास हमला हुआ। उन्होंने बताया कि अचानक जोरदार धमाका हुआ और पूरा जहाज हिल गया।
सुनील ने कहा, “पहले लगा कि इंजन में कोई खराबी हुई है, लेकिन बाद में पता चला कि जहाज पर मिसाइल हमला हुआ है।”
हमले के बाद जहाज में आग लग गई और हालात इतने खराब हो गए कि कई लोगों को समुद्र में कूदकर अपनी जान बचानी पड़ी।
दो भारतीय नाविकों की मौत
इस हमले में भारतीय नाविक दलीप सिंह और आशीष कुमार सिंह की मौत हो गई। दोनों मिडिल ईस्ट संघर्ष में जान गंवाने वाले पहले भारतीय नाविक बने।
उनकी मौत ने भारत में काम कर रहे समुद्री कर्मचारियों और उनके परिवारों के बीच डर बढ़ा दिया है। कई परिवार अब अपने बच्चों को ऐसे इलाकों में काम करने भेजने से डर रहे हैं।
फिर भी लोग क्यों चुन रहे हैं यह काम?
खतरे के बावजूद हजारों भारतीय युवक अब भी merchant navy और व्यापारिक जहाजों की नौकरियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है अच्छी कमाई।
गांवों और छोटे शहरों से आने वाले कई युवाओं के लिए यह नौकरी परिवार की आर्थिक हालत बदलने का मौका बनती है। कई नाविकों को विदेशों में काम करने के बदले भारत की सामान्य नौकरियों से कई गुना ज्यादा सैलरी मिलती है।

हरियाणा के एक नाविक ने कहा, “डर तो लगता है, लेकिन गांव में इतना पैसा नहीं मिलता। परिवार की जिम्मेदारी भी निभानी होती है।”
मिडिल ईस्ट तनाव का बढ़ता असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते हमलों और समुद्री रास्तों पर खतरे की वजह से अब जहाज कंपनियां भी सतर्क हो गई हैं। कई मार्गों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है, लेकिन नाविकों के लिए खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि Strait of Hormuz और आसपास के समुद्री इलाकों में तनाव बढ़ने से व्यापारिक जहाजों पर हमलों का खतरा बना हुआ है। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है।
परिवारों की चिंता बढ़ी
जो लोग समुद्र में काम करते हैं, उनके परिवार हर दिन चिंता में रहते हैं। कई नाविक महीनों तक घर नहीं लौट पाते और अब युद्ध की खबरों ने डर को और बढ़ा दिया है।
इसके बावजूद आर्थिक मजबूरी और बेहतर भविष्य की उम्मीद उन्हें इस खतरनाक पेशे में बने रहने पर मजबूर कर रही है।
