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America Iran तनाव के बीच फिर चढ़े कच्चे तेल के दाम, Hormuz जलडमरूमध्य पर टिकी दुनिया की नजर
ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर के पार, वैश्विक बाजारों में बढ़ी बेचैनी; अमेरिका-ईरान वार्ता और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता कायम
वैश्विक तेल बाजार में एक बार फिर हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक अनिश्चितता तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बनी स्थिति के कारण मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल तेल बाजार किसी ठोस आर्थिक संकेत से ज्यादा भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया दे रहा है।
अमेरिका-ईरान वार्ता बनी चिंता का कारण
हाल के दिनों में अमेरिकी प्रशासन और ईरान के बीच बातचीत को लेकर विरोधाभासी संकेत सामने आए हैं। एक ओर अमेरिका की तरफ से वार्ता जारी रहने की बात कही जा रही है, वहीं ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि अप्रत्यक्ष बातचीत फिलहाल रोक दी गई है।
इन परस्पर विरोधी बयानों ने निवेशकों और तेल कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार को अब इस बात का इंतजार है कि दोनों देशों के बीच किसी समझौते की दिशा में प्रगति होती है या तनाव और बढ़ता है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज़ जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का व्यवधान आता है तो उसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल होती है तो बाजार में राहत देखने को मिल सकती है। लेकिन यदि तनाव बना रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है।
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वैश्विक बाजारों में बढ़ी सतर्कता
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशक केवल राजनीतिक बयानों पर नहीं, बल्कि वास्तविक गतिविधियों पर भी नजर रख रहे हैं। तेल टैंकरों की आवाजाही, समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी हर खबर बाजार की दिशा तय कर रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच स्पष्ट समझौता नहीं होता, तब तक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

अमेरिकी तेल भंडार और निर्यात भी चर्चा में
इस बीच अमेरिका से कच्चे तेल का निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की खबरें भी सामने आई हैं। एशिया और यूरोप के कई देश मध्य पूर्व की अनिश्चितता के बीच अमेरिकी तेल पर अधिक निर्भर होते दिखाई दे रहे हैं।
साथ ही अमेरिकी तेल भंडार में गिरावट के संकेत भी मिले हैं, जिससे आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मांग इसी तरह मजबूत बनी रही और आपूर्ति प्रभावित हुई तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
आगे क्या रहेगा असर?
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि तेल बाजार की अगली दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान संबंधों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि बातचीत सफल रहती है और समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित होता है तो कीमतों में नरमी आ सकती है। वहीं तनाव बढ़ने की स्थिति में वैश्विक बाजारों को एक और बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है।
