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Fuel, Fertiliser और Forex पर बढ़ा खतरा! निर्मला सीतारमण ने क्यों कहा- कीमतें पहुंच गई हैं ‘कल्पना से परे’

ईरान-US तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल, खाद और विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर सरकार की बढ़ी चिंता

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Dainik Diary Zaid 39
मुंबई में कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Fuel, Fertiliser और Forex को लेकर बढ़ती चिंता जाहिर की।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार में उथल-पुथल के बीच भारत में महंगाई को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि देश को अब खासतौर पर तीन FsFuel, Fertiliser और Forex — पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

मुंबई में आयोजित SIDBI यानी Small Industries Development Bank of India के 37वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि खाद की कीमतें अब “कल्पना से परे” पहुंच चुकी हैं। उन्होंने यह भी माना कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के खर्चों पर साफ दिखाई दे रहा है।

लगातार बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम

निर्मला सीतारमण का बयान ऐसे समय आया है जब देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बीते 11 दिनों में पेट्रोल की कीमत में करीब 7.38 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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सोमवार को भी ईंधन के दाम बढ़ाए गए, जो पिछले दो हफ्तों में चौथी बढ़ोतरी मानी जा रही है। इसका असर सिर्फ वाहन चालकों पर नहीं बल्कि ट्रांसपोर्ट, खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ने लगा है।

आखिर क्यों बढ़ रही है चिंता?

मिडिल ईस्ट में जारी US-Iran तनाव के कारण Strait of Hormuz में सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होते ही भारत पर इसका सीधा असर पड़ता है।

वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की अपील अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने संकेत दिया कि सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा और खाद की कीमतें भी भारत के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।

खाद की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन

सीतारमण ने कहा कि fertiliser prices यानी खाद की कीमतें इतनी तेजी से बढ़ी हैं कि वे “unimaginable levels” तक पहुंच गई हैं।

इसका असर सीधे किसानों और कृषि लागत पर पड़ सकता है। अगर खाद महंगी होती है तो खेती का खर्च बढ़ेगा, जिसका असर बाद में फलों, सब्जियों और अनाज की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में अगर अंतरराष्ट्रीय हालात नहीं सुधरे, तो कृषि क्षेत्र में लागत और ज्यादा बढ़ सकती है।

सोने की बढ़ती कीमतें भी चिंता का कारण

वित्त मंत्री ने सोने की कीमतों में तेजी को भी भारत के लिए चुनौती बताया। जब वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ती है, तब निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं। इससे गोल्ड की कीमतें बढ़ने लगती हैं।

भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड आयातकों में शामिल है, इसलिए सोना महंगा होने से विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

आम आदमी पर क्या असर?

महंगे ईंधन और बढ़ती महंगाई का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखने लगा है। ऑफिस जाने का खर्च, खाने-पीने की चीजें और घरेलू बजट लगातार प्रभावित हो रहे हैं।

कई लोगों का कहना है कि सैलरी उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही, जितनी तेजी से रोजमर्रा का खर्च बढ़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।