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क्या इंसानों से बेहतर लड़ेंगे AI फाइटर जेट? अमेरिकी वायुसेना की चेतावनी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता

अमेरिकी एयरफोर्स अधिकारी का बड़ा दावा, आने वाले समय में AI से चलने वाले रोबोट फाइटर मानव पायलटों को छोड़ सकते हैं पीछे

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AI आधारित रोबोट फाइटर सिस्टम पर तेजी से काम कर रही अमेरिकी वायुसेना

दुनिया तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तरफ बढ़ रही है और अब इसका असर युद्ध की दुनिया में भी साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में अमेरिकी वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ऐसी चेतावनी दी है जिसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींच लिया है।

अमेरिकी वायुसेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल क्रिस्टोफर नीमी ने अमेरिकी सीनेट की एक समिति के सामने कहा कि आने वाले समय में AI से लैस रोबोट फाइटर एयरक्राफ्ट इंसानी पायलटों से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है और अब ड्रोन, ऑटोमेशन और AI भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बनने जा रहे हैं।

क्रिस्टोफर नीमी के मुताबिक, ऐसा समय आ सकता है जब बिना पायलट वाले लड़ाकू विमान इंसानों द्वारा उड़ाए जाने वाले फाइटर जेट से ज्यादा तेज, सटीक और प्रभावी साबित होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका ने इस दिशा में तेजी से काम नहीं किया, तो भविष्य में उसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

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अमेरिकी वायुसेना फिलहाल Collaborative Combat Aircraft (CCA) प्रोग्राम पर काम कर रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत ऐसे आधुनिक ड्रोन और फाइटर सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं जो इंसानी पायलटों के साथ मिलकर युद्ध मिशन में काम कर सकें। शुरुआत में ये सिस्टम मानव नियंत्रण में रहेंगे, लेकिन धीरे-धीरे इन्हें ज्यादा स्वतंत्र बनाया जाएगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इन AI फाइटर सिस्टम का इस्तेमाल निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और दुश्मन पर हमला करने जैसे मिशनों में किया जाएगा। खास बात यह है कि ये सिस्टम बेहद तेज फैसले लेने में सक्षम होंगे और जोखिम भरे मिशनों में इंसानी जान को खतरे से बचा सकते हैं।

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विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्ध पूरी तरह तकनीक आधारित हो सकते हैं। पहले जहां सैनिकों और पायलटों की संख्या सबसे बड़ी ताकत मानी जाती थी, वहीं अब AI और ड्रोन टेक्नोलॉजी को निर्णायक माना जा रहा है।

हालांकि AI आधारित हथियारों को लेकर कई चिंताएं भी सामने आ रही हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पूरी तरह मशीनों को युद्ध का नियंत्रण दिया गया, तो इससे बड़े नैतिक और सुरक्षा से जुड़े सवाल पैदा हो सकते हैं। कई देशों में इस बात पर बहस चल रही है कि AI को कितनी स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।

अमेरिका के अलावा चीन और रूस भी तेजी से AI आधारित सैन्य तकनीक विकसित कर रहे हैं। यही वजह है कि दुनिया में अब नई तरह की टेक्नोलॉजी रेस शुरू होती दिखाई दे रही है।

F-22 Raptor और भविष्य के F-47 जैसे लड़ाकू विमानों के साथ इन नए AI सिस्टम को जोड़ने की तैयारी की जा रही है। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में युद्ध के मैदान में इंसान और मशीन दोनों साथ लड़ते दिखाई देंगे।

फिलहाल यह साफ है कि AI अब सिर्फ मोबाइल और कंप्यूटर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह दुनिया की सैन्य रणनीतियों को भी बदलने की तैयारी में है।