World News
खंगाली जाएगी LinkedIn प्रोफाइल, परिवार की भी होगी जांच… H-1B वीज़ा के नियम क्यों हुए इतने सख्त?
अमेरिका ने H-1B वीज़ा आवेदन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया—अब सिर्फ आवेदक ही नहीं, उनके परिवार, नौकरी इतिहास और सोशल मीडिया तक की जांच होगी। विदेशी प्रोफेशनल्स में चिंता बढ़ी।
अमेरिका में काम करने का सपना रखने वाले भारतीयों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीज़ा को लेकर नए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब किसी भी विदेशी कर्मचारी को H-1B देने से पहले उनकी प्रोफाइल से लेकर परिवार तक की विस्तृत जांच की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्रालय और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने निर्देश दिया है कि आवेदक की LinkedIn प्रोफाइल, काम का इतिहास, पुराने नियोक्ता, नौकरी बदलने की टाइमलाइन और सोशल मीडिया गतिविधियों की गहराई से जांच की जाए।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि H-1B वीज़ा का इस्तेमाल कई बार फर्जी अनुभव, गलत जॉब टाइटल और झूठे पेपरवर्क के साथ किया गया था।
किस तरह होगी नई जांच?
नई वीज़ा प्रक्रिया के तहत:
और भी पढ़ें : करोड़पति शेयर का उलटफेर… 13 महीनों में ₹2 लाख सस्ता! कभी MRF को पछाड़ने वाला शेयर अब क्यों फिसला?
- अधिकारी आवेदक के परिवार के बैकग्राउंड की भी जांच करेंगे।
- जिस कंपनी ने H-1B स्पॉन्सर किया है, उनकी भी विशेष वेरिफिकेशन होगी।
- LinkedIn, GitHub, Behance जैसे प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म पर मौजूद प्रोफाइल मैच की जाएँगी।
- जिन लोगों की करियर यात्रा में संदेहजनक गैप या विरोधाभास मिलेगा, उनका वीज़ा रिजेक्ट किया जा सकता है।
- आवेदक से पुराने नियोक्ताओं के संपर्क विवरण और वेरिफिकेशन भी मांगा जा सकता है।
अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि—
“जिसका प्रोफेशनल सफर पारदर्शी और वास्तविक होगा, उसी को H-1B मिलेगा।”
किसे सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए नियम का सबसे ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जो:
- कई बार बेंच मॉडल पर काम कर चुके हैं,
- जिनके जॉब रोल बार-बार बदले गए हैं,
- जिनकी LinkedIn प्रोफाइल और वीज़ा पेपरवर्क में फर्क है,
- या जो लंबे समय तक स्टेटस वेरिफिकेशन से बचते रहे हैं।
भारत, चीन और फिलीपींस जैसे देशों के IT और टेक सेक्टर के कर्मचारियों पर इसका सबसे बड़ा असर पड़ सकता है।

यह नीति आई क्यों?
2 दिसंबर को जारी इस वैश्विक निर्देश में अमेरिका ने साफ कहा है कि वीज़ा प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। पिछले कुछ वर्षों में सामने आए वीज़ा फ्रॉड के मामलों के कारण सरकार सख्त हुई है।
कई आवेदकों ने फर्जी अनुभव, बनावटी जॉइनिंग लेटर और गैर-प्रमाणित कंपनियों के जरिए वीज़ा पाने की कोशिश की थी। अब नई नीति का मकसद ऐसे मामलों पर रोक लगाना है।
पूरी एम्प्लॉयमेंट हिस्ट्री होगी जांच के दायरे में
यह पहला मौका है जब H-1B आवेदन में आवेदक की पूरी एम्प्लॉयमेंट हिस्ट्री की विस्तार से जांच अनिवार्य की गई है।
अधिकारियों के मुताबिक:
- यदि किसी नौकरी के दस्तावेज अधूरे या विरोधाभासी मिले,
- या किसी कंपनी में ज्वाइनिंग की जानकारी गलत पाई गई,
तो H-1B वीज़ा तुरंत रद्द किया जा सकता है।
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि यह नियम खासतौर पर उन मामलों के लिए प्रभावी है जिनमें आवेदक की एक्टिविटी संदिग्ध लगती है या जहां नौकरी स्थिर नहीं रही हो।
भारतीय IT प्रोफेशनल सबसे ज्यादा चिंतित
भारत दुनिया भर में H-1B वीज़ा धारकों में सबसे आगे है। इसलिए भारतीय प्रोफेशनल्स के बीच इस नई नीति को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई लोग मानते हैं कि अब छोटे से छोटा करियर गैप, फ्रीलांसिंग रिकॉर्ड या अपूर्ण प्रोफाइल भी वीज़ा के लिए खतरा बन सकता है।
हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि—
“जिनकी प्रोफाइल साफ और सत्यापित है, उनके लिए किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होगी।”
