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Economy

RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, महंगाई को लेकर बढ़ी चिंता

Reserve Bank of India ने FY27 के लिए ग्रोथ घटाकर 6.9% की, बढ़ते तेल दाम और वैश्विक तनाव बने वजह

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रेपो रेट पर फैसला सुनाते RBI गवर्नर Sanjay Malhotra

देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है। Reserve Bank of India (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का निर्णय लिया है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक हालात और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रही हैं। RBI ने साफ संकेत दिया है कि फिलहाल वह “सावधानी भरी रणनीति” अपनाना चाहता है।

महंगाई पर बढ़ा खतरा

RBI के गवर्नर Sanjay Malhotra ने कहा कि आने वाले समय में महंगाई बढ़ने का खतरा पहले से ज्यादा हो गया है।

उन्होंने बताया कि वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण इनपुट कॉस्ट बढ़ रही है, जिससे आम लोगों पर महंगाई का असर पड़ सकता है।

ग्रोथ अनुमान में कटौती

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान घटाकर 6.9% कर दिया है। इससे पहले यह अनुमान 7.6% के आसपास था।

यह कटौती इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में आर्थिक रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है।

महंगाई का अनुमान 4.6%

केंद्रीय बैंक ने खुदरा महंगाई (Retail Inflation) का अनुमान 4.6% रखा है। हालांकि यह अभी भी RBI के लक्ष्य दायरे में है, लेकिन बढ़ते जोखिमों को देखते हुए सतर्कता जरूरी है।

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क्यों नहीं बदला रेपो रेट?

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंक RBI से कर्ज लेते हैं। इसे बदलने से सीधे तौर पर लोन की EMI और बाजार में पैसे की उपलब्धता पर असर पड़ता है।

RBI ने इस बार रेपो रेट को स्थिर रखकर यह संदेश दिया है कि वह फिलहाल स्थिति को और बेहतर तरीके से समझना चाहता है, बजाय जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम उठाने के।

वैश्विक हालात का असर

वेस्ट एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।

सप्लाई चेन में दिक्कतें, कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत—ये सभी फैक्टर भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए चुनौती बन रहे हैं।

आम लोगों पर क्या असर?

  • फिलहाल लोन की EMI में कोई बदलाव नहीं होगा
  • होम लोन और कार लोन लेने वालों को राहत
  • लेकिन महंगाई बढ़ने का खतरा बना रहेगा

आगे क्या?

RBI के इस फैसले से साफ है कि आने वाले महीनों में अगर महंगाई और बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक सख्त कदम उठा सकता है।

फिलहाल RBI का फोकस आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और महंगाई को नियंत्रण में रखने पर है।

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