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“सिर्फ नियम नहीं, विज़न भी जरूरी”: SEBI चीफ का बड़ा बयान, AI और वैश्विक चुनौतियों पर फोकस
मार्केट में बदलाव के बीच SEBI बनाएगा नई रणनीति—सरल नियम, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर जोर
भारत के पूंजी बाजार को लेकर एक अहम संदेश सामने आया है। Securities and Exchange Board of India (SEBI) के चेयरमैन Tuhin Kanta Pandey ने कहा है कि आने वाले समय में सिर्फ सख्त नियम बनाना काफी नहीं होगा, बल्कि दूरदर्शी सोच (Vision) भी उतनी ही जरूरी होगी।
SEBI के फाउंडेशन डे के मौके पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बाजार कई चुनौतियों से गुजर रहा है—जैसे युद्ध, टैरिफ नीतियां और तेजी से बढ़ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)। ऐसे में नियामक (Regulator) को भी खुद को बदलना होगा।
SEBI की नई प्राथमिकताएं क्या हैं?
Pandey ने बताया कि आने वाले वर्षों में SEBI चार मुख्य क्षेत्रों पर काम करेगा:
- नियमों को सरल और तेज बनाना
- इनोवेशन को बढ़ावा देना
- टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी (Supervision)
- गवर्नेंस और रिस्क मैनेजमेंट को मजबूत करना
उन्होंने यह भी कहा कि SEBI अब तेजी से e-office सिस्टम की ओर बढ़ रहा है और डेटा एनालिटिक्स व टेक्नोलॉजी में अपनी क्षमता बढ़ा रहा है।
बदल चुका है भारतीय शेयर बाजार
SEBI चीफ ने बताया कि भारतीय बाजार ने पिछले कुछ दशकों में बड़ा बदलाव देखा है। पहले जहां ट्रेडिंग पारंपरिक तरीकों से होती थी, वहीं अब पूरा सिस्टम डिजिटल और रियल-टाइम हो चुका है।
स्क्रीन-बेस्ड ट्रेडिंग, डिमैट सिस्टम और मजबूत रिस्क मैनेजमेंट जैसे सुधारों ने बाजार को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाया है।
वैश्विक संकट के बावजूद मजबूत बाजार
Pandey ने यह भी कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय बाजार ने मजबूती दिखाई है। इसका श्रेय वर्षों से किए गए सुधारों और मजबूत नियामक ढांचे को जाता है।
उन्होंने कहा कि निवेशकों का भरोसा ही SEBI की सबसे बड़ी ताकत है, जिसे बनाए रखना सबसे जरूरी है।

सहयोग से मिली सफलता
SEBI की सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें सिर्फ संस्था ही नहीं, बल्कि एक्सचेंज, डिपॉजिटरी, सरकार, मीडिया और निवेशकों का भी बड़ा योगदान है।
आगे का रास्ता
SEBI अब ऐसे सिस्टम पर काम कर रहा है जहां AI और टेक्नोलॉजी के जरिए बाजार की निगरानी और भी स्मार्ट और तेज हो सके।
कुल मिलाकर, SEBI का यह संदेश साफ है कि आने वाले समय में बाजार को संभालने के लिए नियमों के साथ-साथ दूरदृष्टि और तकनीकी समझ भी जरूरी होगी।
