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ईरान-अमेरिका जंग का 20वां दिन: हाइफा रिफाइनरी पर हमला, गैस कीमतें 35% उछलीं, सऊदी अरब ने सैन्य कार्रवाई का रखा अधिकार

कतर के LNG प्लांट में भीषण आग, ईरान के इंटेलिजेंस मंत्री ढेर, मैक्रों ने ट्रंप से की बात — खाड़ी युद्ध अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला रहा है

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ईरान-अमेरिका जंग का 20वां दिन: हाइफा रिफाइनरी पर हमला, गैस कीमतें 35% उछलीं, सऊदी अरब ने सैन्य कार्रवाई का रखा अधिकार
कतर के रास लफ्फान LNG प्लांट में ईरानी हमले के बाद उठती आग की लपटें — दुनिया के सबसे बड़े गैस निर्यात केंद्र को भारी नुकसान।

ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग के 20 दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन बजाय थमने के यह संघर्ष और भयावह होता जा रहा है। गुरुवार को खाड़ी क्षेत्र में हमलों की ऐसी झड़ी लगी कि दुनिया के ऊर्जा बाजार हिल गए और यूरोप में गैस की कीमतें एक ही दिन में 35 फीसदी तक उछल गईं। इजराइल के हाइफा शहर की तेल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ, और अब सऊदी अरब ने भी सैन्य कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखने की बात कह दी है।

कतर का LNG प्लांट तबाह — दुनिया की सबसे बड़ी गैस एक्सपोर्ट फैसिलिटी में आग

QatarEnergy के रास लफ्फान प्लांट — जो दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यात केंद्र है — पर ईरानी मिसाइल हमलों की वजह से “भारी नुकसान” हुआ और भीषण आग लग गई। Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक इस हमले के बाद यूरोपीय प्राकृतिक गैस बेंचमार्क फ्यूचर्स 35 फीसदी तक उछल गए। यह आंकड़ा बताता है कि इस जंग की मार आम आदमी की जेब तक पहुंचने में देर नहीं लगेगी।

सऊदी अरब का कड़ा रुख — “सैन्य कार्रवाई का हक सुरक्षित”

रियाद में क्षेत्रीय विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने साफ कहा कि ईरान के बार-बार के मिसाइल और ड्रोन हमलों के जवाब में सैन्य कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “सऊदी अरब दबाव में नहीं झुकेगा, बल्कि यह दबाव उल्टा पड़ेगा। हमने जरूरत पड़ने पर सैन्य कदम उठाने का अधिकार साफ तौर पर सुरक्षित रखा है।” साथ ही उन्होंने ईरान पर पड़ोसी देशों को डराने-धमकाने की कोशिश का आरोप लगाया। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रियाद और पूर्वी प्रांत के ऊपर आठ ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट किया गया।

ईरान ने सऊदी रिफाइनरी, कुवैती ऑयल प्लांट और कतर के LNG पर एक साथ बोला धावा

गुरुवार को ईरान ने एक साथ कई मोर्चे खोल दिए — लाल सागर पर स्थित सऊदी रिफाइनरी को निशाना बनाया, कतर की LNG सुविधाओं में भीषण आग लगाई और कुवैत की दो तेल रिफाइनरियों को भी तबाह किया। यह हमला इजराइल द्वारा ईरान के विशाल साउथ पार्स गैस फील्ड पर किए गए हमले का जवाब था।

ईरान के इंटेलिजेंस मंत्री मारे गए, इजराइल बोला — “और बड़े सरप्राइज आने वाले हैं”

इजराइली रक्षा मंत्री Israel Katz ने गुरुवार को ऐलान किया कि ईरान के इंटेलिजेंस मंत्री इस्माइल खतीब रात भर चले हमलों में मारे गए। उन्होंने कहा कि “महत्वपूर्ण सरप्राइज” अभी और आने वाले हैं। इससे एक दिन पहले इजराइल पहले से ही ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी और बासिज कमांडर जनरल गोलाम रज़ा सुलेमानी को मार चुका था।

ट्रंप का दोहरा रुख — न फौज भेजेंगे, न ईरान को छोड़ेंगे

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक तरफ स्पष्ट किया कि वे कहीं भी जमीनी सेना तैनात नहीं करेंगे, लेकिन दूसरी तरफ ईरान को कड़ी चेतावनी दी कि अगर कतर के गैस प्लांट पर हमले जारी रहे तो साउथ पार्स फील्ड को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा। व्हाइट हाउस के पूर्व नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर के निदेशक जो केंट ने खुलासा किया कि ट्रंप के ईरान पर हमले के फैसले से पहले कोई “गंभीर बहस” नहीं हुई थी और जो अधिकारी असहमत थे उन्हें राष्ट्रपति तक अपनी बात पहुंचाने से रोका गया।

मैक्रों की कोशिश — “नागरिक ढांचे पर हमले तुरंत रोको”

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप और कतर के अमीर से फोन पर बात की और X पर लिखा कि “नागरिक बुनियादी ढांचे, खासकर ऊर्जा और पानी की आपूर्ति पर हमले बिना देरी किए रोकना सभी के हित में है।” यह पहली बड़ी कूटनीतिक पहल है, लेकिन अभी तक धरातल पर इसका कोई असर नहीं दिखा।

इराक से थोड़ी राहत — 5 दिन की राहत का प्रस्ताव

इराक के प्रभावशाली ईरान समर्थक सशस्त्र गुट Kataeb Hezbollah ने बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हमले 5 दिन के लिए रोकने की पेशकश की है — लेकिन इसके लिए शर्त रखी है कि इजराइल बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर बमबारी बंद करे और इराक में आवासीय क्षेत्रों को निशाना न बनाया जाए।

एक दिल दहलाने वाली खबर यह भी रही कि कब्जे वाले वेस्ट बैंक में ईरानी मिसाइल हमले में तीन फिलिस्तीनी महिलाएं मारी गईं — यह पहली बार है जब ईरान के हमले में फिलिस्तीनियों की जान गई।

यह जंग अब सिर्फ एक सैन्य टकराव नहीं है — यह दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक समुद्री मार्गों और करोड़ों आम लोगों की जिंदगी को सीधे प्रभावित कर रही है। दुनिया की निगाहें अब इस पर हैं कि क्या कूटनीति इस आग को बुझा पाएगी — या यह और भड़केगी।