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अमेरिका ने South Korea से हटाया THAAD मिसाइल सिस्टम, Middle East भेजा — Seoul में मचा हड़कंप
Iran के साथ जारी जंग में अमेरिका अपने सबसे ताकतवर मिसाइल-रोधी हथियार को एशिया से खींच रहा है, और South Korea को डर है कि अब उत्तर कोरिया का सामना कैसे होगा।
दुनिया के सबसे महंगे और खतरनाक मिसाइल-रोधी सिस्टमों में से एक — THAAD — को अमेरिका ने South Korea से हटाकर Middle East की तरफ रवाना कर दिया है। यह खबर अकेले Seoul ही नहीं, बल्कि पूरे Asia-Pacific क्षेत्र को हिला गई है। जिस सिस्टम को 2017 में North Korea की परमाणु धमकियों से बचाव के लिए तैनात किया गया था, उसे अब Iran के साथ चल रही जंग की भट्टी में झोंका जा रहा है।
क्या है THAAD और इसकी ताकत?
Terminal High-Altitude Area Defense — यानी THAAD — Lockheed Martin का बनाया हुआ एक अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली है। इसमें छह माउंटेड लांचर होते हैं, हर लांचर पर आठ इंटरसेप्टर मिसाइलें होती हैं, और एक शक्तिशाली रडार सिस्टम होता है। सीधे शब्दों में कहें तो यह आसमान में ही दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को तबाह कर देता है — धरती पर पहुंचने से पहले ही। एक सिंगल THAAD बैटरी की कीमत लगभग एक अरब डॉलर है और इसे चलाने के लिए करीब 100 सैनिकों की जरूरत होती है।
इसकी खासियत यह है कि यह पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर भी मिसाइलों को नष्ट कर सकता है, जो South Korea जैसे देश के लिए बेहद उपयोगी था — क्योंकि इससे उत्तर कोरिया की परमाणु मिसाइलों को ऊपर ही रोका जा सकता था।
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Middle East क्यों खींचा जा रहा है यह सिस्टम?
अमेरिका ने Iran पर 28 फरवरी 2026 को सैन्य हमले शुरू किए, और पहले दो दिनों में ही 5.6 अरब डॉलर के हथियार फूंक दिए। इस जंग की तीव्रता ने अमेरिका के मिसाइल डिफेंस स्टॉक को बुरी तरह खाली कर दिया।
Jordan में तैनात THAAD का रडार — जिसकी कीमत करीब 30 करोड़ डॉलर थी — Iran से जुड़े एक ड्रोन हमले में बर्बाद हो गया। इसे बदलने के लिए अमेरिका के पास South Korea से सिस्टम खींचने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
10 मार्च 2026 को Washington Post ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से पुष्टि की कि US Army ने South Korea से THAAD के हिस्से Middle East की ओर भेजने शुरू कर दिए हैं। South Korean मीडिया ने भी Osan Air Base पर भारी-भरकम अमेरिकी ट्रांसपोर्ट विमानों — C-5 Galaxy और C-17 Globemaster — की आवाजाही रिपोर्ट की।
South Korea की बेचैनी
जैसे किसी घर का सुरक्षा गार्ड अचानक दूसरे मोहल्ले में तैनात हो जाए, वैसा ही हाल Seoul का है। South Korea के राष्ट्रपति Lee Jae-myung ने कैबिनेट बैठक में खुलकर कहा कि “हमने इस पुनः तैनाती का विरोध किया है, लेकिन सच्चाई यह है कि हम अपनी बात पूरी तरह मनवा नहीं सकते।”
राष्ट्रपति Lee के इस बयान को विशेषज्ञों ने एक असामान्य सार्वजनिक विरोध बताया, जो Seoul की वैध सुरक्षा चिंताओं को उजागर करता है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि North Korea के खिलाफ उनकी रक्षा क्षमता अभी भी मजबूत है।
South Korean अखबार The Chosun Daily ने लिखा कि देश में सुरक्षा को लेकर चिंता और घबराहट का माहौल फैल रहा है।
China की प्रतिक्रिया — पुरानी आपत्ति, नया मौका
जब 2017 में THAAD को South Korea में तैनात किया गया था, तब China ने जबरदस्त विरोध किया था। चीन का तर्क था कि THAAD का रडार उसकी सीमा के बेहद अंदर तक देख सकता है, जो उसकी सैन्य गतिविधियों की निगरानी को संभव बनाता है। इसके जवाब में China ने दक्षिण कोरियाई सामान का अनौपचारिक बहिष्कार किया, K-pop कॉन्सर्ट रद्द कराए और छह साल तक ग्रुप टूर पर बैन लगाया था।

अब जब THAAD हट रहा है, तो China चुप नहीं बैठा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Guo Jiakun ने कहा कि “South Korea में THAAD की तैनाती का हमारा विरोध अटल है।” यानी China THAAD जाने से खुश नहीं, और वापस आने की बात से और भी नाराज।
THAAD की सीमाएं उजागर हुईं
चीनी सैन्य विशेषज्ञ Song Zhongping ने कहा कि यह घटनाक्रम THAAD की सीमाओं को उजागर करता है। उनके अनुसार, Middle East में पहले से तैनात THAAD सिस्टम इतने बेअसर हो गए थे कि उन्हें दूसरे क्षेत्र से बुलाना पड़ा — यह अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा करने में भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।
विश्लेषकों का अनुमान है कि अमेरिका के पास अब 200 या उससे कम THAAD इंटरसेप्टर बचे हैं, और South Korea में मौजूद बाकी सभी इंटरसेप्टर भी जल्द हटाए जा सकते हैं।
एक सिस्टम, तीन मोर्चों की जंग
यह पूरा घटनाक्रम एक बड़ी सच्चाई सामने रखता है — अमेरिका एक साथ ईरान से लड़ रहा है, उत्तर कोरिया पर नजर रख रहा है, और China को चेक में रखने की कोशिश कर रहा है। लेकिन उसके पास THAAD जैसी महंगी और दुर्लभ प्रणालियों की संख्या सीमित है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों ने THAAD जैसे इंटरसेप्टर्स की जरूरत को अपरिहार्य बना दिया है, लेकिन इनकी भरपाई इतनी जल्दी नहीं हो सकती।
South Korea अब उस मोड़ पर खड़ा है जहां उसे अपनी स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर ज्यादा निर्भर होना होगा। राष्ट्रपति Lee ने खुद कहा कि यह घटना दर्शाती है कि दक्षिण कोरिया को अमेरिका पर अपनी सुरक्षा निर्भरता घटानी होगी।
जो सिस्टम एशिया की सुरक्षा की धुरी था, वह अब Middle East की आग बुझाने निकल पड़ा है — और पीछे छूट गई है एक बेचैन दुनिया।
