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खामेनेई की मौत: 37 साल में पहली बार ईरान के पास कोई सुप्रीम लीडर नहीं अब क्या होगा इस्लामी गणराज्य का?

अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमले में खामेनेई की हत्या के बाद ईरान में उत्तराधिकार का संकट गहराया, IRGC के हाथों में आई सत्ता की बागडोर

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खामेनेई का परिवार भी बना निशाना — दामाद और बहू की मौत की रिपोर्ट, कौन हैं खामेनेई के बच्चे? | Dainik Diary

तेहरान/नई दिल्ली। 28 फरवरी 2026 की रात ईरान की राजधानी तेहरान में जो हुआ, उसकी कल्पना भी शायद किसी ने नहीं की थी। अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई मारे गए। 86 साल के खामेनेई 1989 से ईरान की सत्ता का केंद्र थे — यानी करीब 37 साल तक। और अब एक झटके में वह कुर्सी खाली है, जिस पर बैठने वाला कोई तय नहीं है।

1 मार्च की सुबह ईरानी राज्य मीडिया ने पहले इनकार किया, फिर चुप्पी साधी और अंततः स्वीकार किया — खामेनेई नहीं रहे। देश में 40 दिन के शोक और 7 दिन की सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान कर दिया गया।

एक आदमी की मौत, एक पूरे सिस्टम का इम्तिहान

भारत में जब किसी बड़े नेता का निधन होता है तो उसके उत्तराधिकारी की चर्चा पहले से होती है। लेकिन ईरान में यह लग्ज़री नहीं थी। खामेनेई ने अपने जीवनकाल में कभी सार्वजनिक रूप से अपने उत्तराधिकारी का नाम नहीं लिया था। ESPNcricinfo उन्होंने कहा था कि चुनाव “सच्चाई और देश की जरूरत” के आधार पर होना चाहिए — न किसी व्यक्तिगत पसंद के आधार पर।

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ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने 1 मार्च की सुबह खामेनेई की मौत की आधिकारिक पुष्टि की। उनके साथ उनकी बेटी, दामाद, पोता और बहू भी इस हमले में मारे गए।

अंतरिम परिषद: एक सुधारवादी और एक कट्टरपंथी एक साथ

संविधान के मुताबिक फौरी तौर पर एक अस्थायी नेतृत्व परिषद (Provisional Leadership Council) गठित की गई है। इसमें सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और कट्टरपंथी न्यायपालिका प्रमुख गोलामहोसैन मोहसेनी ईजेई शामिल हैं — एक अजीब और असहज जोड़ी। यह वैसा ही है जैसे किसी देश में कांग्रेस और BJP को साथ मिलकर सरकार चलानी पड़े।

IRGC — असली खिलाड़ी कौन है?

जब सत्ता का केंद्र खाली हो, तो ताकत उसके पास जाती है जिसके हाथ में बंदूक हो। ईरान में यह है — इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC)। IRGC दशकों से सिर्फ एक सैन्य संगठन नहीं, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था, खुफिया तंत्र और राजनीति पर भी गहरी पकड़ रखता है। कोई भी उत्तराधिकारी बिना IRGC के समर्थन के प्रभावी ढंग से शासन नहीं कर सकता।

विश्लेषकों का कहना है कि ईरान अब तीन बड़े इम्तिहानों का सामना कर रहा है — क्या उसका सुरक्षा तंत्र दबाव में टिका रह सकता है? क्या अभिजात वर्ग किसी उत्तराधिकारी पर सहमत हो सकता है? और क्या आम जनता इस संकट को एक बड़े राजनीतिक विस्फोट में बदल देगी?

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अगला सुप्रीम लीडर कौन?

यह सवाल अभी किसी के पास जवाब नहीं। खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन पिता से बेटे को सत्ता सौंपना इस्लामी गणराज्य में विवादास्पद माना जाएगा। कुछ लोग इसे 1979 में उखाड़े गए शाह के राजवंश जैसा मानेंगे — जो क्रांति की भावना के खिलाफ है।

दूसरे संभावित नाम हैं — अली लारिजानी (पूर्व संसद अध्यक्ष), हसन खोमेनी (क्रांति के संस्थापक आयतुल्लाह खोमेनी के पोते), और कुछ वरिष्ठ मौलवी। लेकिन विशेषज्ञ कह रहे हैं कि ईरान का सिस्टम एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं — “ईरान एक नेता को खोने से बचने के लिए बना है।”

इज़राइल का अगला कदम?

इज़राइल के सूत्रों का कहना है कि यह अभियान अभी खत्म नहीं हुआ। ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को पूरी तरह नष्ट करना लक्ष्य है। ईरान ने बदले की कसम खाई है और पहले ही इज़राइली ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं।

दुनिया की निगाहें अब उस 88 सदस्यीय Assembly of Experts पर हैं जो नया सुप्रीम लीडर चुनेगी। लेकिन युद्ध के बीच यह बैठक कब और कैसे होगी — यह खुद एक बड़ा सवाल है।

ईरान 1979 की क्रांति के बाद सबसे बड़े मोड़ पर खड़ा है। जो भी अगला होगा — वह एक अलग ईरान का चेहरा होगा।

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