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ईरान युद्ध का बड़ा असर: पेट्रोल नहीं, डीज़ल क्यों हुआ सबसे महंगा?

होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक सप्लाई पर झटका, डीज़ल की कीमतों में पेट्रोल से ज्यादा उछाल

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Iran War Impact: डीज़ल क्यों हुआ पेट्रोल से ज्यादा महंगा? जानिए पूरी वजह
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच तेल टैंकर, जिससे वैश्विक डीज़ल सप्लाई पर पड़ा बड़ा असर

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की जेब तक पहुंचने लगा है। Iran और Israel के बीच युद्ध के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है।

इसका सबसे बड़ा असर Strait of Hormuz के बंद होने से पड़ा है, जो दुनिया के करीब 20% तेल सप्लाई का प्रमुख रास्ता है।

पेट्रोल से ज्यादा डीज़ल क्यों महंगा हुआ?

हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, United States में डीज़ल की कीमतों में लगभग 45% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि पेट्रोल करीब 35% तक ही महंगा हुआ।

अब सवाल उठता है—ऐसा क्यों?

विशेषज्ञों का कहना है कि डीज़ल पहले से ही सीमित मात्रा में उपलब्ध था। यानी सप्लाई कम और मांग ज्यादा थी। ऐसे में जैसे ही युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित हुई, डीज़ल की कीमतें तेजी से उछल गईं।

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होर्मुज़ का असर कितना बड़ा?

होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे अहम रास्ता है। इसके बंद होने से न सिर्फ कच्चे तेल, बल्कि डीज़ल और जेट फ्यूल की सप्लाई पर भी गहरा असर पड़ा है।

खाड़ी क्षेत्र की रिफाइनरियां खास तौर पर डीज़ल और जेट फ्यूल का बड़ा निर्यात करती हैं। ऐसे में जब यह सप्लाई रुकती है, तो दुनिया के पास इसका कोई आसान विकल्प नहीं होता।

डीज़ल पर निर्भर सेक्टर की मुश्किलें

डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर ट्रांसपोर्ट और खेती जैसे सेक्टर पर पड़ता है।

जहां आम लोग पेट्रोल बचाने के लिए कम यात्रा कर सकते हैं या कारपूलिंग अपना सकते हैं, वहीं ट्रक ड्राइवर, किसान और इंडस्ट्रीज के पास ऐसा कोई विकल्प नहीं होता।

Iran War Impact: डीज़ल क्यों हुआ पेट्रोल से ज्यादा महंगा? जानिए पूरी वजह


यही वजह है कि डीज़ल महंगा होने से पूरी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है।

अमेरिका भी क्यों नहीं संभाल पाया स्थिति?

दुनिया का सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक होने के बावजूद, United States इस कमी को पूरा नहीं कर पाया।

कारण साफ है—डीज़ल और जेट फ्यूल बनाने के लिए खास किस्म के कच्चे तेल और रिफाइनिंग प्रक्रिया की जरूरत होती है, जो मुख्य रूप से खाड़ी देशों में केंद्रित है।

आने वाले दिनों में क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो डीज़ल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा, क्योंकि ट्रांसपोर्ट महंगा होने से हर चीज की लागत बढ़ जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार कितना संवेदनशील है और किसी एक क्षेत्र में संकट पूरे विश्व को प्रभावित कर सकता है।

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