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कुत्ते बचा सकते हैं आपकी जान! बेंगलुरु की Dognosis ने बनाई सांस से कैंसर पहचानने की तकनीक
सिर्फ 10 मिनट में बिना खून जांच या स्कैन के कैंसर का संकेत, 91% तक सटीकता का दावा
क्या एक कुत्ता आपकी जान बचा सकता है? यह सवाल अब हकीकत में बदलता दिख रहा है। बेंगलुरु की हेल्थ-टेक स्टार्टअप Dognosis ने एक ऐसी अनोखी तकनीक विकसित की है, जिसमें प्रशिक्षित कुत्ते इंसान की सांस से कैंसर का शुरुआती पता लगा सकते हैं।
इस स्टार्टअप को Akash Kulgod और Itamar Bitan ने मिलकर शुरू किया। इनका मानना है कि कुत्तों की सूंघने की क्षमता इतनी तेज होती है कि वे शरीर में होने वाले छोटे-छोटे केमिकल बदलावों को भी पहचान सकते हैं।
कैसे काम करता है यह टेस्ट?
यह प्रक्रिया बेहद आसान और बिना दर्द वाली है। व्यक्ति को सिर्फ 10 मिनट तक एक मास्क पहनकर सामान्य सांस लेनी होती है। इसके बाद उस मास्क को लैब में भेजा जाता है, जहां प्रशिक्षित कुत्ते उसे सूंघकर जांच करते हैं।
कुत्ते शरीर में बनने वाले Volatile Organic Compounds (VOCs) को पहचानते हैं। ये ऐसे केमिकल्स होते हैं जो कैंसर जैसी बीमारियों के दौरान शरीर में बनते हैं और एक खास गंध (odour signature) पैदा करते हैं।
कितनी है सटीकता?
एक बड़े क्लीनिकल अध्ययन में इस तकनीक ने करीब 91% सटीकता दिखाई है। यह रिसर्च Journal of Clinical Oncology में प्रकाशित हुई है और इसमें कर्नाटक के 6 अस्पतालों में 3,000 से ज्यादा लोगों पर परीक्षण किया गया।
क्या है इसकी खासियत?
- कोई खून जांच नहीं
- कोई स्कैन नहीं
- फास्टिंग की जरूरत नहीं
- सिर्फ सांस के जरिए जांच
सबसे बड़ी बात, यह टेस्ट बेहद सस्ता है—करीब $2 (लगभग ₹160) में।
AI और कुत्तों का अनोखा मेल
Dognosis इस तकनीक में सिर्फ कुत्तों पर निर्भर नहीं है, बल्कि Machine Learning और Brain-Computer Interface का भी इस्तेमाल कर रहा है। इससे कुत्तों के फैसलों को डेटा में बदलकर और ज्यादा सटीक बनाया जा रहा है।

क्यों है यह भारत के लिए गेम-चेंजर?
भारत जैसे देशों में जहां महंगे स्कैन और टेस्ट हर किसी की पहुंच में नहीं हैं, वहां यह तकनीक शुरुआती स्तर पर कैंसर की पहचान के लिए बेहद कारगर साबित हो सकती है।
स्टार्टअप फिलहाल भारत और अमेरिका सहित कई देशों के रेगुलेटर्स के साथ काम कर रहा है, ताकि इसे जल्द ही बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।
अगर यह तकनीक सफल होती है, तो भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता लगाना पहले से कहीं ज्यादा आसान और सस्ता हो सकता है।
