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आखिर कैसा होता है चांद के पीछे का अंधेरा? Artemis II मिशन में 40 मिनट का सन्नाटा
NASA के Artemis II मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों का पृथ्वी से संपर्क टूटा, इतिहास के सबसे दूर के मानव मिशन में आया रोमांचक पल
जब इंसान धरती से लाखों किलोमीटर दूर पहुंचता है, तो हर सेकंड इतिहास बनता है—और कभी-कभी डर भी। ऐसा ही एक पल देखने को मिला NASA के Artemis II मिशन में, जब अंतरिक्ष यात्रियों का संपर्क अचानक पृथ्वी से टूट गया।
यह कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, बल्कि अंतरिक्ष का एक स्वाभाविक नियम—जब अंतरिक्ष यान चांद के पीछे चला जाता है, तो रेडियो सिग्नल सीधे पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाते। इसे “ब्लैकआउट” कहा जाता है।
क्या हुआ Artemis II मिशन में?
Artemis II मिशन, जो इंसानों को चांद के करीब ले जाने वाला ऐतिहासिक अभियान है, अपने वापसी सफर के दौरान एक खास चरण से गुजरा। जैसे ही अंतरिक्ष यान Moon के पीछे गया, पृथ्वी से उसका संपर्क पूरी तरह टूट गया।
यह ब्लैकआउट भारतीय समय के अनुसार सुबह करीब 4:14 बजे शुरू हुआ और लगभग 40 मिनट तक चला। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह अकेले थे—न कोई संदेश, न कोई निर्देश।
कौन थे उस मिशन में?
इस ऐतिहासिक मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल थे:
ये सभी उस समय मानव इतिहास के सबसे दूर के सफर पर थे, जिससे यह मिशन और भी खास बन गया।
ब्लैकआउट क्यों होता है?
जब कोई अंतरिक्ष यान चांद के पीछे पहुंचता है, तो चांद पृथ्वी और यान के बीच आ जाता है। इससे रेडियो सिग्नल ब्लॉक हो जाते हैं। इसे “लूनर कम्युनिकेशन ब्लैकआउट” कहा जाता है।
इस दौरान:

मिशन कंट्रोल कोई निर्देश नहीं दे सकता- अंतरिक्ष यात्री खुद ही फैसले लेते हैं
- सिस्टम पूरी तरह ऑटोमेटेड रहता है
यही कारण है कि यह समय सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
कितना खतरनाक होता है यह पल?
हालांकि यह प्रक्रिया पहले से प्लान होती है, लेकिन इसमें जोखिम भी होता है। अगर इस दौरान कोई तकनीकी खराबी आ जाए, तो उसे तुरंत ठीक करना मुश्किल हो जाता है।
फिर भी, Artemis II का यह ब्लैकआउट सफलतापूर्वक पूरा हुआ—जो यह साबित करता है कि इंसान अब गहरे अंतरिक्ष में भी आत्मनिर्भर होता जा रहा है।
क्यों है यह मिशन खास?
Artemis II सिर्फ एक मिशन नहीं, बल्कि भविष्य के चंद्र और मंगल मिशनों की तैयारी है। यह पहली बार है जब इतने लंबे समय बाद इंसान चांद के आसपास भेजे गए हैं।
यह मिशन आने वाले Artemis III के लिए रास्ता तैयार कर रहा है, जिसमें इंसानों को चांद की सतह पर उतारा जाएगा।
एक नया अध्याय शुरू
Artemis II का यह 40 मिनट का ब्लैकआउट सिर्फ एक तकनीकी घटना नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह दिखाता है कि इंसान अब अंतरिक्ष में और भी गहराई तक जाने के लिए तैयार है।
जब संपर्क वापस आया, तो यह सिर्फ एक सिग्नल नहीं था—यह मानव साहस और तकनीक की जीत का संकेत था।
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