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सांप क्यों खा जाते हैं अपने ही जैसे सांप? विज्ञान ने खोला चौंकाने वाला राज
नई रिसर्च में खुलासा—भूख, मुकाबला और सर्वाइवल की रणनीति है ‘कैनिबलिज्म’
सांपों की दुनिया हमेशा से रहस्यों से भरी रही है, लेकिन एक आदत ऐसी है जो लोगों को सबसे ज्यादा चौंकाती है—अपने ही जैसे दूसरे सांप को खा जाना। सुनने में यह किसी डरावनी कहानी जैसा लगता है, लेकिन विज्ञान के मुताबिक यह एक सामान्य और प्राकृतिक व्यवहार है।
हाल ही में Biological Reviews में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में 200 से ज्यादा सांपों की प्रजातियों में करीब 500 से अधिक ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं, जहां सांपों ने अपने ही जैसे दूसरे सांपों को खाया। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह व्यवहार (कैनिबलिज्म) एक बार नहीं, बल्कि कई बार अलग-अलग समय में विकसित हुआ है।
आखिर क्यों करते हैं ऐसा?
सांपों को “opportunistic feeders” माना जाता है, यानी उन्हें जो भी आसानी से मिल जाए, वे उसे खा लेते हैं। जब उनके आसपास शिकार की कमी होती है, तो वे दूसरे सांप को भी भोजन के रूप में देख सकते हैं।
भूख और प्रतिस्पर्धा का खेल
कठिन परिस्थितियों में यह आदत उनके लिए दोहरा फायदा देती है—
- उन्हें हाई-एनर्जी भोजन मिल जाता है
- और एक प्रतिस्पर्धी (competitor) भी कम हो जाता है
यानी यह सिर्फ भूख मिटाने का तरीका नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व को बचाने की रणनीति भी है।
क्या सभी सांप ऐसा करते हैं?
हर सांप ऐसा नहीं करता, लेकिन कई प्रजातियों में यह व्यवहार ज्यादा देखने को मिलता है। खासतौर पर बड़े आकार के सांप छोटे या कमजोर सांपों को अपना शिकार बना लेते हैं।
उदाहरण के तौर पर, कुछ इलाकों में किंग स्नेक जैसे सांप दूसरे जहरीले सांपों को भी खा जाते हैं। यह दिखाता है कि उनके लिए ‘शिकार’ की कोई तय सीमा नहीं होती।

प्रकृति का संतुलन
यह व्यवहार भले ही इंसानों को अजीब लगे, लेकिन प्रकृति में इसका अपना महत्व है। इससे प्रजातियों की संख्या नियंत्रित रहती है और पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) का संतुलन बना रहता है।
डर नहीं, समझ जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि हमें ऐसे व्यवहार को डर या घृणा की नजर से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक नजरिए से समझना चाहिए। प्रकृति में हर जीव अपने तरीके से जीवित रहने की कोशिश करता है—और सांपों का यह व्यवहार उसी का एक हिस्सा है।
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