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Donald Trump का उल्टा पड़ा दांव? खामेनेई की हत्या से ईरान कमजोर नहीं, और मजबूत हो गया — एमजे अकबर
भारत के पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने कहा — खामेनेई अब शहीद बन गए हैं, और शहीद कभी कमजोरी की निशानी नहीं होते
राजनीति में अक्सर ऐसा होता है — जो चाल चली जाती है, वो उल्टी पड़ जाती है। और इस वक्त दुनिया यही देख रही है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब ईरान पर हमले का आदेश दिया, तो उनका घोषित मकसद था — ईरान में सत्ता परिवर्तन। ट्रंप ने खुद एक वीडियो संदेश में कहा था कि उनका उद्देश्य ईरान के “इस्लामी शासन को खत्म करना” और ईरानी जनता को सत्ता अपने हाथ में लेने के लिए प्रेरित करना है।
लेकिन भारत के पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर का मानना है कि यह रणनीति उल्टी पड़ सकती है।
“अनचाहे नतीजों का कानून लागू हो गया”
एएनआई से बात करते हुए एमजे अकबर ने कहा कि “अनचाहे नतीजों का कानून शायद पहले ही लागू हो चुका है। ट्रंप ने यह युद्ध यह कहकर शुरू किया कि उनका उद्देश्य ईरान में सत्ता परिवर्तन है। लेकिन अयातुल्लाह खामेनेई की हत्या ने इस्लामी शासन को कमजोर करने की बजाय उसे और मजबूत कर दिया है।”
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अकबर ने कहा कि खामेनेई अब शिया समुदाय की नजर में एक नेता से बढ़कर “शहीद” बन गए हैं — और यह बदलाव ईरानी शासन के लिए एकजुटता का नया स्रोत बन सकता है।
यह बात बिल्कुल वैसी ही है जैसे 1984 में ऑपरेशन ब्लूस्टार के बाद हुआ था — जब एक नेता की हत्या ने उन्हें एक विचारधारा का प्रतीक बना दिया। इतिहास बताता है कि शहीद हमेशा अपने दुश्मनों के लिए सबसे बड़ी गलती साबित होते हैं।
ईरान के अंदर की कहानी — दो रंग
यह संघर्ष इतना सीधा नहीं है। तेहरान की सड़कों पर कुछ लोग खामेनेई की तस्वीर थामे रो रहे थे, तो कुछ लोग उनकी मौत की खबर सुनकर जश्न मना रहे थे। ईरानी समाज में यह विभाजन कोई नई बात नहीं है — लेकिन जब बाहरी दुश्मन हमला करे, तो अंदर के मतभेद अक्सर पिघल जाते हैं और राष्ट्रवाद की भावना उभर आती है।

ट्रंप का “वर्स्ट केस” डर
ट्रंप ने जर्मन चांसलर फ्रीडरिश मर्ज़ के साथ मुलाकात में खुद माना कि उनका सबसे बड़ा डर यह है कि खामेनेई की जगह कोई “उतना ही बुरा” नेता आ जाए। यह बयान खुद बताता है कि व्हाइट हाउस को भी पूरा यकीन नहीं है कि यह रणनीति काम करेगी।
रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ ने सोमवार को कहा — “यह सत्ता परिवर्तन की जंग नहीं है।” लेकिन साथ में यह भी जोड़ा — “हालांकि, शासन तो बदल ही गया।” यह दोहरा संदेश खुद अमेरिकी नीति की उलझन को दर्शाता है।
भारत की दुविधा
भारत के लिए यह पूरा मामला एक बड़ी कूटनीतिक पहेली है। एमजे अकबर जैसे जानकार इस पर खुलकर बोल रहे हैं — और उनका यह विश्लेषण महत्वपूर्ण है। भारत के ईरान के साथ कई आर्थिक और रणनीतिक हित जुड़े हैं। चाबहार बंदरगाह, तेल आयात, और लाखों भारतीय प्रवासी — सब इस युद्ध की आग में झुलस रहे हैं।
भारत सरकार अभी तक चुप्पी साधे हुए है — क्योंकि अमेरिका मित्र है, ईरान भी पुराना साझेदार है। ऐसे में कोई एक पक्ष लेना आसान नहीं।
आखिर में एक सवाल
क्या ट्रंप ने सच में इतिहास बदल दिया — या सिर्फ एक नए और ज्यादा जटिल युग की शुरुआत की है? एमजे अकबर का जवाब साफ है — जब किसी को शहीद बना दो, तो उसका विचार कभी नहीं मरता।
