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महंगे होते जा रहे इलेक्ट्रॉनिक्स: क्या AI बूम बना कीमतों में आग का कारण?
टेक यूट्यूबर मनोज सारू का दावा—यह सिर्फ महंगाई नहीं, बल्कि AI कंपनियों की भारी मांग का असर
अगर आपको हाल के महीनों में मोबाइल, टीवी या लैपटॉप खरीदना महंगा लग रहा है, तो आप अकेले नहीं हैं। भारत समेत दुनिया भर में इलेक्ट्रॉनिक सामानों की कीमतों में अचानक उछाल देखा जा रहा है—और इसके पीछे की वजह सिर्फ सामान्य महंगाई नहीं है।
प्रसिद्ध टेक यूट्यूबर Manoj Saru ने इस बढ़ोतरी पर एक दिलचस्प नजरिया साझा किया है। उनके अनुसार, “यह सिर्फ सामान्य महंगाई नहीं है, बल्कि AI बूम का सीधा असर है।”
AI की बढ़ती भूख ने बदला बाजार
मनोज सारू के मुताबिक, आज की बड़ी टेक कंपनियां—जैसे डेटा सेंटर और क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स—भारी मात्रा में स्टोरेज डिवाइसेज जैसे SSD, RAM और मेमोरी चिप्स खरीद रही हैं।
इससे बाजार में सप्लाई कम हो रही है और डिमांड तेजी से बढ़ रही है। नतीजा—कीमतें आसमान छू रही हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक मेमोरी कार्ड जो 9 महीने पहले ₹5,400 में खरीदा गया था, आज वही ₹14,500 तक पहुंच गया है—यानी करीब तीन गुना महंगा।
सिर्फ मोबाइल नहीं, हर चीज पर असर
यह बढ़ोतरी सिर्फ स्मार्टफोन्स या टीवी तक सीमित नहीं है।
- फ्रिज
- एयर कंडीशनर
- अन्य घरेलू उपकरण
इन सभी की कीमतों में भी आने वाले समय में इजाफा देखने को मिल सकता है।
निर्माताओं का कहना है कि कच्चे माल की लागत बढ़ना और रुपये की कमजोरी भी इस बढ़ोतरी के बड़े कारण हैं।
स्मार्टफोन मार्केट पर पड़ा असर
रिसर्च फर्म Counterpoint Research के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट में 6% की गिरावट आई है।
इसकी मुख्य वजह है:
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- DRAM और NAND मेमोरी की कमी
- बढ़ती लागत
- कमजोर उपभोक्ता मांग
विशेषज्ञों का कहना है कि मेमोरी कंपनियां अब ज्यादा मुनाफे के लिए AI डेटा सेंटर को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर प्रभावित हो रहा है।
आम उपभोक्ताओं पर सबसे ज्यादा मार
कीमतों में यह बढ़ोतरी खासतौर पर मिड-रेंज और बजट सेगमेंट के ग्राहकों को ज्यादा प्रभावित कर रही है।
जहां एक तरफ प्रीमियम ब्रांड्स जैसे Apple पर इसका असर कम दिख रहा है, वहीं कीमत-संवेदनशील बाजारों में चीनी ब्रांड्स की बिक्री में गिरावट देखी गई है।
इसके चलते अब लोग नए डिवाइस खरीदने के बजाय रिफर्बिश्ड (पुराने) डिवाइस की तरफ भी रुख कर रहे हैं।

क्या आगे और महंगा होगा टेक?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक AI सेक्टर में निवेश और मांग इसी तरह बढ़ती रहेगी, तब तक इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
ऊर्जा लागत, लॉजिस्टिक्स खर्च और वैश्विक तनाव भी कीमतों को और बढ़ा सकते हैं।
निष्कर्ष
आज का दौर टेक्नोलॉजी का है, लेकिन यही टेक्नोलॉजी आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही है। AI जहां भविष्य बना रहा है, वहीं वर्तमान में यह इलेक्ट्रॉनिक्स को महंगा भी बना रहा है।
अब देखना यह होगा कि कंपनियां सप्लाई बढ़ाकर कीमतों को काबू में ला पाती हैं या नहीं।
