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“तुमने कहा था चलो करते हैं!” Donald Trump ने ईरान जंग की ज़िम्मेदारी रक्षामंत्री Pete Hegseth पर डाली, व्हाइट हाउस में घमासान

मेम्फिस में एक बैठक के दौरान ट्रंप ने Hegseth को सामने बिठाकर कहा — “Pete, तुम पहले बोले थे — चलो करते हैं”; चार हफ्ते की जंग में 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए, अब ट्रंप बच निकलने की कोशिश में हैं।

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ट्रंप ने Hegseth पर डाली ईरान जंग की ज़िम्मेदारी — "तुमने कहा था चलो करते हैं" | Dainik Diary
मेम्फिस में ट्रंप ने रक्षामंत्री Pete Hegseth को बगल में बिठाकर कह दिया — "तुम पहले बोले थे, चलो करते हैं"; अब अमेरिका पूछ रहा है — ईरान जंग का असली ज़िम्मेदार कौन?

वाशिंगटन/मेम्फिस। अमेरिका की राजनीति में एक पुरानी कहावत है — “जब जहाज डूबने लगे, तो कप्तान किसी और पर दोष मढ़ देता है।” अब ऐसा ही कुछ व्हाइट हाउस में होता दिख रहा है।

ईरान के खिलाफ चल रही जंग के चार हफ्ते बाद, जब जीत की कोई तस्वीर नहीं बन रही, जब 13 अमेरिकी सैनिक शहीद हो चुके हैं और जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल रही है — तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बयान दे दिया जिसने अमेरिका की राजनीति में भूचाल ला दिया।

“Pete, तुम पहले बोले थे”

23 मार्च 2026 को टेनेसी के मेम्फिस में एक सार्वजनिक बैठक में ट्रंप ने अपने रक्षामंत्री Pete Hegseth को बगल में बिठाए हुए कहा — “Pete, मुझे लगता है तुम पहले बोले थे — और तुमने कहा था, ‘चलो करते हैं, क्योंकि हम उन्हें परमाणु हथियार नहीं बनाने दे सकते।'”

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बस यह एक वाक्य काफी था। पूरे अमेरिका में हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर लोग पूछने लगे — क्या ट्रंप Hegseth को “बलि का बकरा” बना रहे हैं?

कौन हैं Pete Hegseth?

Pete Hegseth — जो पहले Fox News के एक टीवी एंकर थे — को ट्रंप ने अमेरिका का रक्षामंत्री बनाया। इस जंग के दौरान Hegseth पेंटागन प्रेस कॉर्प्स के सामने जोरदार भाषण देते रहे, मीडिया को डाँटते रहे कि वे जंग की सकारात्मक खबरें क्यों नहीं दिखाते — लेकिन ज़मीन पर तस्वीर बद से बदतर होती जा रही थी।

यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी क्रिकेट टीम का कोच मैच हारने के बाद कहे — “मैंने तो बोला था मत खेलो, खिलाड़ियों ने ज़िद की।”

जंग की असली वजह क्या थी?

इस जंग को शुरू करने की वजह अलग-अलग अधिकारी अलग-अलग बता रहे हैं। कुछ का कहना है कि इज़राइल वैसे भी हमला करने वाला था, इसलिए अमेरिका ने साथ दिया। कुछ का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब था। और अब खुद ट्रंप कह रहे हैं कि Hegseth ने उन्हें उकसाया।

यानी तीन अलग-अलग कहानियाँ — एक जंग के लिए। यह वही स्थिति है जो 2003 में इराक युद्ध के वक्त थी — जब WMD (Weapons of Mass Destruction) का झूठ सामने आया और फिर हर अमेरिकी अधिकारी दूसरे पर ठीकरा फोड़ने लगा था।

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JD Vance और घर के भीतर की दरार

खुद ट्रंप ने स्वीकार किया कि उपराष्ट्रपति JD Vance इस जंग के उतने उत्साही समर्थक नहीं थे — हालाँकि Vance ने सार्वजनिक रूप से कोई विरोध नहीं किया। इसके अलावा राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी केंद्र के पूर्व प्रमुख Joe Kent ने इसी जंग के विरोध में पिछले हफ्ते इस्तीफा दे दिया।

व्हाइट हाउस के अंदर दरार साफ दिख रही है।

“बस के नीचे आने वाला है Hegseth”

मशहूर podcaster Jon Favreau ने X पर लिखा — “Hegseth अगली प्रेस ब्रीफिंग बस के नीचे से देंगे।” यानी यह तो बस शुरुआत है — अगर जंग और बिगड़ी, तो Hegseth की कुर्सी जाना तय मानो।

अमेरिका में ऐसा पहले भी हुआ है। 2006 में जब इराक जंग बेकाबू हो गई तो तत्कालीन राष्ट्रपति Bush ने रक्षामंत्री Donald Rumsfeld को हटा दिया था — वही Rumsfeld जिन्होंने खुद सबसे पहले इराक पर हमले की वकालत की थी।

अब क्या होगा Hegseth का?

एक अमेरिकी अखबार ने लिखा — “ट्रंप की यह टिप्पणी प्रशंसा भी हो सकती है और पेंटागन में बड़े बदलाव की ज़मीन तैयार करना भी — यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व में क्या होता है।”

दूसरे शब्दों में — अगर डील हो गई, तो Hegseth हीरो। अगर जंग बढ़ी, तो Hegseth की छुट्टी।

आम अमेरिकी की राय

सड़क पर खड़े किसी भी अमेरिकी से पूछिए — उसका बेटा सेना में है, घर का किराया बढ़ गया है, पेट्रोल महँगा हो गया है। और सरकार इस जंग में पैसा फूँक रही है। यही वह गुस्सा है जो 2026 के मध्यावधि चुनावों में ट्रंप और रिपब्लिकन

पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।

राजनीति में जब नेता “बलि के बकरे” ढूँढने लगें — तो समझ लीजिए, असली संकट शुरू हो चुका है।