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“जब तक अमेरिका और इज़रायल घुटने नहीं टेकते, शांति नहीं” ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने सीजफायर की पेशकश ठुकराई
तीन हफ्ते से जल रहे ईरान युद्ध में शांति की उम्मीद धुएं में — Mojtaba का पहला विदेश नीति सत्र, और जवाब था — “बदला लेंगे”
Tehran। ईरान और अमेरिका-इज़रायल के बीच छिड़ी जंग को तीन हफ्ते बीत चुके हैं। अब तक कम से कम 2,000 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। दुनिया के कई देश शांति की कोशिश में लगे हैं — लेकिन ईरान के नए सर्वोच्च नेता Ayatollah Mojtaba Khamenei ने मंगलवार को साफ कर दिया कि वो किसी भी तरह की शांति वार्ता के लिए तैयार नहीं हैं।
एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने Reuters को बताया कि दो मध्यस्थ देशों ने ईरान के विदेश मंत्रालय तक “तनाव कम करने या अमेरिका के साथ सीजफायर” के प्रस्ताव पहुंचाए थे। लेकिन Mojtaba Khamenei ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया।
अधिकारी ने कहा कि सर्वोच्च नेता ने अपने पहले विदेश नीति सत्र में अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ बदले का रुख “बेहद कठोर और गंभीर” रखा। उनका जवाब था — जब तक अमेरिका और इज़रायल घुटने नहीं टेकते, हार नहीं मानते और मुआवज़ा नहीं देते, तब तक शांति का वक्त नहीं आया।
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कौन हैं Mojtaba Khamenei?
8 मार्च 2026 को एक धार्मिक सभा ने Mojtaba Khamenei को उनके पिता Ayatollah Ali Khamenei की जगह ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना, जिनकी 28 फरवरी को हत्या कर दी गई थी।56 साल के Mojtaba अब दुनिया के सबसे ताकतवर धार्मिक-राजनीतिक पदों में से एक पर बैठे हैं।
लेकिन उनके बारे में एक बड़ा रहस्य भी है। उनके चुने जाने के लगभग दो हफ्ते बाद भी उनका कोई वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक नहीं हुई है। उनका पहला संदेश राज्य टेलीविजन पर एक एंकर ने पढ़कर सुनाया, जबकि स्क्रीन पर उनकी एक पुरानी स्थिर तस्वीर दिखाई गई। यानी वो कहां हैं, कैसे हैं — इसकी कोई पुष्टि नहीं।
बदले की बात, नए मोर्चों की चेतावनी
Mojtaba ने अपने संदेश में कहा — “हम अपने शहीदों के खून का बदला लेना नहीं भूलेंगे। यह बदला सिर्फ हमारे पिता की शहादत के लिए नहीं है — हर वो ईरानी जो दुश्मन के हाथों शहीद हुआ, उसका बदला एक अलग और स्वतंत्र मामला है।”
उन्होंने यह भी संकेत दिए कि ईरान नए मोर्चे खोलने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारी उन अन्य क्षेत्रों में युद्ध विस्तार की संभावनाओं का अध्ययन कर रहे हैं जहां दुश्मन कम अनुभवी और अधिक कमज़ोर है। यह किसी के लिए भी चिंता का विषय होना चाहिए।
ठीक वैसे जैसे 2006 में Israel-Hezbollah युद्ध के दौरान Hezbollah ने उत्तरी इज़रायल में अप्रत्याशित रॉकेट हमले शुरू किए और इज़रायल को अंदाज़ा नहीं था कि लड़ाई इतने मोर्चों पर फैलेगी — Mojtaba का यह बयान उसी तरह की रणनीतिक चेतावनी लगती है।

Hormuz जलडमरूमध्य और तेल संकट
Strait of Hormuz अभी भी काफी हद तक बंद है। Trump के अमेरिकी सहयोगियों से इसे दोबारा खुलवाने की अपील का कोई असर नहीं हुआ, जिससे ऊर्जा कीमतें बढ़ रही हैं और महंगाई का खतरा मंडरा रहा है।
यह जलमार्ग दुनिया के तेल व्यापार का एक पांचवां हिस्सा संभालता है। इसके बंद रहने का असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ रहा है जो खाड़ी से कच्चा तेल मंगाते हैं। पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों पर दबाव पहले से दिखने लगा है।
Trump और Netanyahu की प्रतिक्रिया
Trump ने हाल ही में Mojtaba की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा — “हमला इतना कामयाब रहा कि इसने ज़्यादातर उम्मीदवारों को खत्म कर दिया।” Netanyahu ने भी संकेत दिया कि “इज़रायल का हाथ” Khamenei वंश के किसी भी उत्तराधिकारी का पीछा करता रहेगा।
यानी एक तरफ ईरान कह रहा है — “बदला लेकर रहेंगे”, और दूसरी तरफ अमेरिका और इज़रायल कह रहे हैं — “तुम्हारा नया नेता टिकेगा नहीं।” इस बीच आम लोग — चाहे ईरानी हों, इज़रायली हों या अमेरिकी सैनिक — इस युद्ध की कीमत चुका रहे हैं।
दुनिया की निगाहें अब इस पर हैं कि क्या कोई तीसरा पक्ष — शायद कोई अरब देश, यूरोपीय संघ, या संयुक्त राष्ट्र — इस आग को बुझाने में कामयाब होगा, या यह और फैलेगी।

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