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चीन में गिरे ताकतवर जनरल्स: Xi Jinping की मिलिट्री पर्ज के पीछे क्या है कहानी और सीमा पर इसका असर
PLA के बड़े अफसरों पर गिरी गाज, सत्ता के केंद्र में बढ़ता डर या रणनीतिक बदलाव? चीन की अंदरूनी राजनीति अब सीमाओं तक असर दिखा रही है
चीन की राजनीति और सेना के गलियारों में इन दिनों हलचल तेज है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चल रही तथाकथित मिलिट्री पर्ज ने कई सीनियर सैन्य अधिकारियों को सत्ता से बाहर कर दिया है। जिन जनरल्स को कभी चीनी सेना (PLA) की रीढ़ माना जाता था, वे अब अचानक “गायब” हो चुके हैं या जांच के दायरे में हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई सिर्फ भ्रष्टाचार के आरोपों तक सीमित नहीं है। जानकार मानते हैं कि यह शी जिनपिंग की सत्ता को और मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है, जिसमें सेना पर पूरी तरह नियंत्रण बेहद अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में मिसाइल फोर्स, रॉकेट यूनिट और हाई-लेवल कमांड से जुड़े कई बड़े नाम हटाए जा चुके हैं।
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इस पर्ज का सबसे अहम पहलू यह है कि इसका असर सिर्फ बीजिंग तक सीमित नहीं रह गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब सेना के भीतर अनिश्चितता और डर का माहौल बनता है, तो उसका असर चीन की सीमाई रणनीति पर भी पड़ता है। खासकर भारत, ताइवान और दक्षिण चीन सागर जैसे संवेदनशील इलाकों में।

कुछ रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अंदरूनी अस्थिरता के समय चीन या तो ज्यादा आक्रामक रुख अपनाता है ताकि ध्यान भटकाया जा सके, या फिर अस्थायी तौर पर सैन्य गतिविधियों में सतर्कता बढ़ाता है। हाल के महीनों में सीमा से जुड़ी गतिविधियों और बयानों में यह तनाव साफ झलकता है।
दिलचस्प बात यह है कि जिन जनरल्स को हटाया गया, वे सभी शी जिनपिंग के बेहद भरोसेमंद माने जाते थे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह भ्रष्टाचार विरोधी अभियान है या फिर सत्ता के भीतर बढ़ते अविश्वास का संकेत?
आम चीनी नागरिकों के लिए यह खबरें सीमित जानकारी तक ही पहुंचती हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे चीन की आंतरिक कमजोरी और रणनीतिक बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि यह मिलिट्री पर्ज चीन को और मजबूत बनाती है या उसके सुरक्षा ढांचे में दरार पैदा करती है।
