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“ड्रोन और जेट देखकर दिल डूब जाता है” Iran के पास फँसे भारतीय नाविकों की दर्दनाक कहानी
Bandar Abbas बंदरगाह पर दो हफ्तों से फँसे हज़ारों भारतीय नाविक घर लौटने को तरस रहे हैं — पास में जलते जहाज़, आसमान में ड्रोन और दिल में बस एक ख्वाहिश
छह महीने हो गए घर गए हुए। माँ की आवाज़ याद है, घर की खुशबू याद है। लेकिन समुद्र के बीच खड़े जहाज़ पर खड़े 26 साल के Ambuj के सामने अभी एक ही सवाल है — “घर कब जाऊँगा?”
यह कोई फिल्म की कहानी नहीं है। यह हकीकत है उन हज़ारों भारतीय नाविकों की, जो आज Iran-US युद्ध की आग में फँसे हुए हैं — न आगे जा सकते हैं, न पीछे।
कौन हैं ये नाविक?
Ambuj उन लगभग 23,000 भारतीयों में से एक है जो Gulf region के व्यापारिक, बंदरगाह और ऑफशोर जहाज़ों पर काम करते हैं। यह पूरा इलाका अभी Iran-US-Israel युद्ध की सबसे बड़ी मार झेल रहा है।
Iran के Bandar Abbas बंदरगाह पर पिछले दो हफ्तों से फँसे Ambuj ने Reuters को बताया कि पास में ड्रोन और मिसाइलों से जहाज़ जल रहे हैं। वो छह महीने से घर नहीं गए और अपने परिवार से मिलने के लिए बेताब हैं।
सोचिए — एक नाविक जो पहले से ही महीनों से समुद्र पर है, परिवार से दूर है, और अब उसके आसपास जंग छिड़ गई है। यह उसके लिए कैसा लगता होगा — जैसे किसी को पहले से बंद कमरे में बंद किया जाए और फिर उस कमरे में आग लग जाए।
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“दिल डूब जाता है जब ड्रोन देखते हैं”
भारत की ओर जा रहे एक जहाज़ पर सवार M. Kanta ने बताया कि उनके जहाज़ के पास से बार-बार ड्रोन और लड़ाकू विमान गुज़रते हैं। उन्होंने कहा — “सायरन बजते हैं, हमने दूर एक जहाज़ में आग देखी और वायरलेस पर चेतावनी संदेश मिले।”
Kanta ने बताया कि मार्च की शुरुआत में Iran के अधिकारियों ने उनका Starlink इंटरनेट बंद करवा दिया था। 6 मार्च के बाद इसे फिर शुरू करने की अनुमति मिली — तब जाकर वो परिवार से बात कर सके और सही खबरें जान सके।
एक अन्य नाविक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा — “इन दिनों एक ही शौक रह गया है — जहाज़ से जो विमान, जेट या ड्रोन दिखें उन्हें पहचानने की कोशिश करना। नींद नहीं आती। बहुत घबराहट है।”
यह घबराहट बेवजह नहीं है। एक ऐसी जगह जहाँ किसी भी क्षण मिसाइल आ सकती है, जहाँ आसमान में लड़ाकू विमान हों और पानी में जलते जहाज़ — वहाँ सोना तो दूर, साँस लेना भी मुश्किल लगता है।
तीन भारतीय नाविकों की मौत, एक लापता
यह संकट सिर्फ डर तक सीमित नहीं है। Strait of Hormuz में Iranian हमलों में अब तक तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है और एक अभी भी लापता है।
यह खबर सुनकर हर भारतीय परिवार का दिल काँप जाता है जिसका कोई अपना उस इलाके में फँसा है। फोन पर आवाज़ आए तो राहत, न आए तो रात भर आँखें खुली रहती हैं।
भारत — दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता देश है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 3 लाख से ज़्यादा भारतीय नाविक दुनिया भर के जहाज़ों पर काम करते हैं। यह वो मेहनती लोग हैं जो घर से दूर रहकर देश के लिए विदेशी मुद्रा कमाते हैं, दुनिया के व्यापार को चलाते हैं।

लेकिन आज इन्हीं लोगों की जान खतरे में है — और दुनिया की दो महाशक्तियों की लड़ाई में ये निर्दोष नाविक पिस रहे हैं।
Starlink बंद — परिवार से कट गया नाता
जब मार्च की शुरुआत में Iran ने Starlink बंद करवाया, तो इन नाविकों का परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट गया। घर पर बैठे माँ-बाप, पत्नी-बच्चे — सब बेखबर कि उनका इंसान कहाँ है, कैसा है। यह कुछ दिन उन परिवारों के लिए किसी काले तूफान से कम नहीं रहे होंगे।
सरकार क्या कर रही है?
दिल्ली ने कहा है कि वो नाविकों की सुरक्षा के लिए Iran सहित कई अधिकारियों से समन्वय कर रही है। Shipping Ministry के विशेष सचिव Rajesh Kumar Sinha ने बताया कि Gulf region में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
Iran ने शुक्रवार को दो भारतीय LPG जहाज़ों को Strait of Hormuz से गुज़रने की अनुमति दी। Iran के भारत में राजदूत Mohammad Fathali ने भी भारतीय जहाज़ों को सुरक्षित रास्ता देने की पुष्टि की।
“बस घर जाना है”
Ambuj की बात पर वापस आते हैं। 26 साल की उम्र, छह महीने से समुद्र पर, और अब जंग के बीच फँसे हुए। उनसे पूछो क्या चाहिए — जवाब बस इतना है: “घर जाना है।”
यह एक नाविक की नहीं, हज़ारों भारतीय परिवारों की भावना है। इन नाविकों के घर में बूढ़े माँ-बाप हैं, छोटे बच्चे हैं — जो रोज़ खिड़की के पास बैठकर इंतज़ार करते हैं कि उनका अपना कब लौटेगा।
Dainik Diary की तरफ से इन सभी बहादुर नाविकों को सलाम, और उनके परिवारों के लिए दुआ — कि वो जल्द से जल्द सुरक्षित घर लौटें।
