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कराची से लाहौर तक ‘अज्ञात हमलावरों’ का खौफ, पाकिस्तान में एक-एक कर ढेर हो रहे आतंकी
लश्कर, जैश और हिजबुल के कई बड़े चेहरे निशाने पर—लाहौर में आमिर हमजा पर हमला, सवालों के घेरे में पाकिस्तान
पाकिस्तान इन दिनों एक अजीब और रहस्यमयी घटनाओं की कड़ी का गवाह बन रहा है। कराची से लेकर लाहौर तक, आतंक से जुड़े बड़े नामों पर “अज्ञात हमलावरों” द्वारा हमले हो रहे हैं। हालिया घटना में लाहौर में Amir Hamza पर गोलीबारी ने इस सिलसिले को और चर्चा में ला दिया है।
पुलिस के अनुसार, मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने आमिर हमजा पर हमला किया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। फिलहाल उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। आमिर हमजा, पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन Lashkar-e-Taiba के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं और लंबे समय से भारत के लिए खतरा माने जाते रहे हैं।
लेकिन यह कोई एकलौती घटना नहीं है। पिछले दो-तीन वर्षों में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कई ऐसे आतंकी मारे जा चुके हैं, जिन्हें भारत ने “मोस्ट वांटेड” सूची में शामिल किया हुआ था। हैरानी की बात यह है कि इन हत्याओं के पीछे अक्सर “अज्ञात हमलावर” या “रहस्यमयी परिस्थितियां” ही बताई जाती हैं।
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हाल ही में Muhammad Tahir Anwar की मौत भी संदिग्ध हालात में हुई। वह Masood Azhar के बड़े भाई थे और आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammed में अहम भूमिका निभाते थे। उनकी अचानक हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए थे।
इसी तरह, पिछले साल मार्च में Abu Qatal उर्फ क़तल सिंधी को भी अज्ञात हमलावरों ने मार गिराया था। वह Hafiz Saeed का करीबी माना जाता था और 2024 में जम्मू-कश्मीर के रियासी हमले का कथित मास्टरमाइंड बताया गया था, जिसमें कई लोगों की जान गई थी।

इन लगातार हो रही घटनाओं ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ये आतंकी आपसी गैंगवार का शिकार हो रहे हैं, या फिर कोई बड़ी गुप्त रणनीति काम कर रही है—इस पर अभी तक स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन हमलों के पीछे कई संभावनाएं हो सकती हैं। कुछ लोग इसे आतंकी संगठनों के भीतर की अंदरूनी लड़ाई मानते हैं, तो कुछ इसे अंतरराष्ट्रीय दबाव या खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि पाकिस्तान की सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इन घटनाओं पर ज्यादा खुलकर कुछ नहीं कह रही हैं, लेकिन लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह जरूर संकेत देती हैं कि देश के भीतर हालात सामान्य नहीं हैं।
भारत के नजरिए से देखें तो यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि जिन आतंकियों को लंबे समय से पकड़ना मुश्किल था, वे अब खुद अपने ही देश में निशाना बन रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सिलसिला जारी रहता है या फिर इसके पीछे का सच सामने आता है।
