Connect with us

International News

Donald Trump का बड़ा दावा: “ईरान जल्द सरेंडर करने वाला है” 24 घंटे बाद नया नेता बदले की कसम खा गया

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने जी‑7 बैठक में ईरान को सरेंडर की कगार पर बताया, लेकिन उसके अगले दिन ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने प्रतिशोध की घोषणा कर दिया, जिससे तनाव और बढ़ गया।

Published

on

Trump on Oil Prices: ईरान संकट के बीच तेल महंगा होने पर ट्रंप बोले – इससे अमेरिका को फायदा
ट्रंप और ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के बीच तीखी बयानबाजी के बीच विश्व राजनीति में बढ़ता तनाव।

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनावपूर्ण रिश्तों में फेरबदल देखने को मिला है। कुछ ही दिनों पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने जी‑7 देशों के साथ एक वर्चुअल मीटिंग में यह दावा किया कि ईरान “अब आत्मसमर्पण (सरीनडर) करने वाला है।” ट्रम्प ने इस बयान में कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य कार्रवाई ने ईरान की क्षमताओं को इतना कमजोर कर दिया है कि वह अब और ज्यादा लड़ाई नहीं झेल सकता।

ट्रम्प ने इस दावे के साथ ईरान के शासन को “खत्म होने वाला” करार दिया और कहा कि उनका राष्ट्र अब कमजोर स्थिति में है। उन्होंने संदर्भ में यह भी कहा कि ईरान के पास सामने आने वाला कोई नेतृत्व स्पष्ट नहीं है जो आधिकारिक तौर पर हार घोषित कर सके।

और भी पढ़ें : Dubai Airport के पास गिरे Iranian Drones एक भारतीय समेत 4 लोग घायल, हवाई यातायात जारी

हालांकि ट्रम्प का यह बड़ा दावा करने के लगभग 24 घंटे के भीतर ही ईरान की ओर से सख्त प्रतिक्रिया आई। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने देश के नाम अपने पहले संदेश में कहा कि वह अपने “शहीदों” का बदला जरूर लेंगे और संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने सैन्य और आर्थिक दबाव के बावजूद हार मानने से इनकार किया और विशेष रूप से कहा कि ईरानी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का बयान उन शक्तिशाली दावों में से एक था जिसने दुनिया भर में मीडिया और राजनयिक गलियारों में व्यापक चर्चा छेड़ दी। कई देशों के नेताओं ने युद्ध के संभावित विस्तार और आर्थिक प्रभाव जैसे तेल की कीमतों में वृद्धि के बारे में चिंता जताई है।

GettyImages 2264788964


ईरान की ओर से प्रतिशोध की धमकी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। मिडिल ईस्ट में पहले से ही तनावपूर्ण हालात और अमेरिका‑इजराइल के मिलिटरी अभियान के बीच, इस बयानबाजी ने वैश्विक राजनीति को फिर से केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वक्तव्य अक्सर कूटनीति और वास्तविक युद्ध के बीच एक महीन रेखा खींचते हैं, और इससे क्षेत्रीय देशों के लिए भी नई चुनौतियां उभर सकती हैं।

विशेष रूप से, ट्रंप और उनके प्रशासन के समर्थक यह दावा कर रहे हैं कि संयुक्त प्रयासों के चलते ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं में भारी गिरावट आई है। दूसरी ओर, ईरान अभी भी प्रतिशोध के तौर पर बंधक सैन्य बलों और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक स्थानों के नियंत्रण को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अब विश्व समुदाय को मामले को शांत कराने के लिए साझा बातचीत और कूटनीतिक उपायों पर जोर देना चाहिए। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध की संभावित विभीषिका ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी चिंताएँ बढ़ा दी हैं, खासतौर से तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों के सम्बन्ध में।

यह स्पष्ट है कि ट्रंप का आत्मसमर्पण वाला बयान और ईरान की सख्त प्रतिक्रिया दोनों ही भविष्य में क्षेत्रीय संतुलन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। डीप्लोमेसी और संवाद की आवश्यकता आज पहले से कहीं अधिक गंभीरता से महसूस की जा रही है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *