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गाजा पुनर्निर्माण योजना पर संकट: Donald Trump की ‘पीस बोर्ड’ को फंड की कमी, अटक गया बड़ा प्लान
ईरान युद्ध के बीच दान में आई भारी गिरावट, अरब देशों के वादों के बावजूद जमीनी काम शुरू नहीं हो पाया
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच गाजा के पुनर्निर्माण को लेकर बनाई गई अमेरिका की महत्वाकांक्षी योजना अब मुश्किलों में घिरती नजर आ रही है। डोनाल्ड ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल, जिसका मकसद गाजा को फिर से खड़ा करना था, फिलहाल फंड की कमी से जूझ रही है।
सूत्रों के अनुसार, गाजा के पुनर्निर्माण के लिए करीब 17 अरब डॉलर की मदद का वादा किया गया था, लेकिन अब तक इसका बहुत छोटा हिस्सा ही मिल पाया है। बताया जा रहा है कि केवल तीन देशों—संयुक्त अरब अमीरात, मोरक्को और अमेरिका—ने ही वास्तविक रूप से फंड जारी किया है।
यह योजना उस समय बनाई गई थी जब वाशिंगटन में एक बड़े सम्मेलन के दौरान खाड़ी देशों ने गाजा के पुनर्निर्माण और प्रशासन के लिए आर्थिक सहायता देने का वादा किया था। इस योजना के तहत हमास के निरस्त्रीकरण के बाद एक नई प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की जानी थी।
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इसी के लिए ‘नेशनल कमेटी फॉर एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा’ (NCAG) का गठन किया गया था, जिसमें फिलिस्तीनी तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया गया। इसका उद्देश्य गाजा की सत्ता को हमास से लेकर एक स्थिर और अंतरराष्ट्रीय समर्थन वाले प्रशासन को सौंपना था।
हालांकि, जमीनी हकीकत काफी अलग है। फंड की कमी और सुरक्षा हालात के चलते यह समिति अब तक गाजा में प्रवेश भी नहीं कर पाई है। एक सूत्र के मुताबिक, “अभी स्थिति यह है कि काम शुरू करने के लिए जरूरी पैसा ही उपलब्ध नहीं है।”
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने इस स्थिति को और खराब कर दिया है। क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति के कारण कई देशों ने अपने आर्थिक वादों को फिलहाल टाल दिया है।

इस बीच, हमास ने संकेत दिया है कि वह गाजा की प्रशासनिक जिम्मेदारी छोड़ने के लिए तैयार है, लेकिन इसके बदले में वह इजरायल से स्पष्ट गारंटी चाहता है कि उसकी सेना गाजा से पूरी तरह हटे और हमले बंद हों।
दूसरी ओर, इजरायल का कहना है कि जब तक हमास हथियार नहीं डालता, तब तक सेना की वापसी संभव नहीं है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना हुआ है।
गाजा की हालत बेहद गंभीर है। पिछले दो वर्षों के संघर्ष में वहां की लगभग 80% इमारतें नष्ट हो चुकी हैं और पुनर्निर्माण के लिए करीब 70 अरब डॉलर की जरूरत बताई जा रही है। लाखों लोग विस्थापित हैं और भोजन तथा बुनियादी सुविधाओं का संकट बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही फंडिंग और राजनीतिक सहमति नहीं बनी, तो गाजा का संकट और गहरा सकता है। ट्रंप की यह पहल, जिसे एक बड़े शांति प्रयास के तौर पर देखा जा रहा था, अब कई चुनौतियों के बीच फंसी हुई है।

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