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Trump बोले — “Ceasefire ठीक चल रहा है”, पर Hormuz पर नाकाबंदी का वक्त तय, Iran ने दी कड़ी चेतावनी

Islamabad में 21 घंटे की वार्ता बेनतीजा रही, अब समुद्री रास्ते पर तनाव चरम पर — दुनिया की नज़रें Strait of Hormuz पर टिकीं

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Trump बोले — "Ceasefire ठीक चल रहा है", पर Hormuz पर नाकाबंदी का वक्त तय, Iran ने दी कड़ी चेतावनी
Strait of Hormuz — दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा, जो अब US-Iran तनाव के केंद्र में है। CENTCOM ने सोमवार से नाकाबंदी लागू करने का ऐलान किया।

अमेरिका और Iran के बीच जारी युद्ध अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर आ गया है। Pakistan की राजधानी Islamabad में 21 घंटे चली उच्च-स्तरीय वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म होते ही राष्ट्रपति Donald Trump ने Strait of Hormuz की नाकाबंदी का ऐलान कर दिया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल ceasefire “ठीक चल रही है।”

Hormuz पर नाकाबंदी — क्या है पूरी योजना?

US Central Command (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि सोमवार सुबह 10 बजे EDT (भारतीय समयानुसार रात 7:30 बजे) से Hormuz Strait की नाकाबंदी लागू होगी। CENTCOM ने कहा कि यह कदम “सभी देशों के जहाज़ों पर निष्पक्ष रूप से लागू होगा।”

हालांकि एक अहम राहत भी दी गई है — जो जहाज़ दो गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा कर रहे हैं, उन्हें जलडमरूमध्य से गुज़रने की अनुमति होगी। यानी नाकाबंदी मुख्यतः ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाती है।

एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार यह कदम Iran को यह दिखाने के लिए उठाया गया है कि वार्ता के ठप होने पर उसकी “दबाव की सीमा” कहाँ तक है।

Hormuz में रुका जहाज़ी यातायात

Trump के ऐलान के तुरंत बाद असर दिखने लगा। Lloyd’s List Intelligence ने रिपोर्ट किया कि Trump की घोषणा के बाद Strait of Hormuz से “सभी यातायात” रुक गया। दो जहाज़ जो जलडमरूमध्य से बाहर निकल रहे थे, वे वापस लौट गए। यह उस वक्त हुआ जब ceasefire के बाद सीमित यातायात अभी-अभी बहाल होना शुरू हुआ था।

Iran का जवाब — “Hormuz हमारे नियंत्रण में है”

Iran के Revolutionary Guard Navy ने साफ कहा कि Hormuz Strait पर उनका “पूर्ण नियंत्रण” है और कोई भी सैन्य जहाज़ इस रास्ते से आया तो उसे “कड़ा और ताकतवर जवाब” मिलेगा। हालांकि गैर-सैन्य जहाज़ों के लिए जलडमरूमध्य खुला बताया गया।

Iran के Parliament Speaker Mohammad Bagher Qalibaf — जिन्होंने Islamabad में Iran की वार्ता टीम का नेतृत्व किया — ने Trump की धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि इनका Iranian जनता पर कोई असर नहीं होगा। उन्होंने वार्ता को “गहन, गंभीर और चुनौतीपूर्ण” बताया और कहा कि Iran ने “अच्छी नीयत दिखाने के लिए ठोस पहल की थी।”

Iran का आरोप — अमेरिका ने बातचीत पटरी से उतारी

Iranian विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि Tehran “पूरी ईमानदारी” से बातचीत में शामिल था और एक समझौते के करीब भी पहुँच गया था। उन्होंने लिखा, “जब हम ‘Islamabad MoU’ से बस एक कदम दूर थे, तभी हमें अतिवाद, बदलती शर्तें और नाकाबंदी का सामना करना पड़ा।”

Araghchi ने आगे कहा — “अच्छी नीयत का जवाब अच्छी नीयत से मिलता है। दुश्मनी का जवाब दुश्मनी से।”

अमेरिका की ‘लाल लकीरें’

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एक अनाम अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया गया कि Vice President JD Vance ने वार्ता में Washington की गैर-समझौतावादी शर्तें स्पष्ट कर दीं। इनमें शामिल हैं — Iran का कभी भी परमाणु हथियार न बनाना, uranium संवर्धन पूरी तरह बंद करना, प्रमुख परमाणु केंद्रों को ध्वस्त करना, Hamas, Hezbollah और Houthis को फंडिंग बंद करना, और Strait of Hormuz को सबके लिए खुला रखना।

Iran इन सभी शर्तों पर सहमत नहीं हो सका — और यही बातचीत टूटने की बड़ी वजह बनी।

Britain के minesweepers — दावा पर सवाल

Trump ने यह भी कहा कि United Kingdom इस क्षेत्र में minesweepers भेजेगा। लेकिन Britain के रक्षा मंत्रालय ने इस दावे की तुरंत पुष्टि नहीं की। British विदेश मंत्री Yvette Cooper ने पहले दर्जनों देशों के साथ समन्वय में Hormuz से mines हटाने की योजना पर चर्चा ज़रूर की थी। इस सिलसिले में इस सप्ताह एक अनुवर्ती बैठक की उम्मीद भी है।

सात हफ्ते का युद्ध, और गहरा होता संकट

यह युद्ध अपने सातवें हफ्ते में है। 28 फरवरी को अमेरिका और Israel के समन्वित हमलों से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक हज़ारों लोगों की जान जा चुकी है और वैश्विक बाज़ार बुरी तरह हिले हैं। 22 अप्रैल को ceasefire खत्म होने से पहले कोई समझौता न होना — दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता बनता जा रहा है।

Hormuz Strait — जहाँ से दुनिया का 20 फीसदी तेल और LNG गुज़रता है — अब सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि एक वैश्विक युद्धक्षेत्र की दहलीज़ बन चुका है।