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Donald Trump का ईरान को दो टूक जवाब “एयर डिफेंस, नेवी, नेतृत्व सब खत्म, अब बात करना चाहते हो? बहुत देर हो गई!”
Truth Social पर ट्रंप का सबसे आक्रामक बयान — ईरान के बातचीत के प्रस्ताव को किया सिरे से खारिज; जानिए क्या है ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का अगला कदम
वाशिंगटन। कभी-कभी इतिहास की सबसे बड़ी बातें बहुत कम शब्दों में कही जाती हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अपने Truth Social अकाउंट पर जो लिखा, वो पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया।
ट्रंप ने लिखा — “उनका एयर डिफेंस, एयरफोर्स, नेवी और नेतृत्व — सब खत्म हो चुका है। अब वे बात करना चाहते हैं। मैंने कहा — बहुत देर हो गई!”
यह बयान उस वक्त आया जब ईरान की तरफ से बातचीत के संकेत मिल रहे थे — लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया कि जंग के मैदान में जो फैसला हो चुका है, उसे बातचीत की मेज पर नहीं बदला जा सकता।
पहले कहा था — बात करेंगे, फिर पलट गए
यह कहानी उतनी सीधी नहीं है जितनी दिखती है। 1 मार्च को ट्रंप ने खुद घोषणा की थी कि अमेरिका ने ईरान के बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है — लेकिन कुछ ही घंटों बाद ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी ने बातचीत से इनकार कर दिया। और फिर ट्रंप ने भी पलटी मारी — अब उनका जवाब था “बहुत देर हो गई।”
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ईरान के जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र दूत अली बहरैनी ने भी कह दिया कि इस वक्त अमेरिका से बात करने की एकमात्र भाषा “रक्षा की भाषा” है और बातचीत की उपयोगिता पर उन्हें गहरा संदेह है।
ट्रंप का दावा — “सब कुछ तबाह कर दिया”
ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा कि ईरान पर हर चीज़ “नॉक आउट” हो चुकी है — उनके पास न एयर डिफेंस बचा, न एयरफोर्स, न नेवी।उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने पहले हमला करने की योजना बनाई थी इसलिए उन्होंने प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक का फैसला किया।
ट्रंप ने The Atlantic को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान परमाणु वार्ता में बहुत देर से आया और पहले ही समझौता हो सकता था। वहीं उन्होंने CNBC को बताया कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी “तय समय से आगे” चल रहा है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी — क्या है मकसद?
व्हाइट हाउस के अनुसार ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के चार प्रमुख लक्ष्य हैं — ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना, उसके बैलिस्टिक मिसाइल भंडार को नष्ट करना, आतंकी नेटवर्क को कमज़ोर करना और नौसेना को तबाह करना। ट्रंप ने पहले कहा था कि यह ऑपरेशन 4-5 हफ्ते चल सकता है।

जब शांति “दहलीज़ पर” थी — तभी शुरू हुई जंग
इस पूरे मामले का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि जंग से ठीक एक दिन पहले शांति लगभग तय थी। 27 फरवरी को ओमान के विदेश मंत्री ने कहा था कि एक “सफलता” मिली है और ईरान ने परमाणु समझौते पर हामी भर दी थी — शांति “पहुँच के भीतर” थी। लेकिन 28 फरवरी की सुबह बम बरसने लगे।
ट्रंप ने खुद माना — “सबसे बुरी स्थिति यह होगी कि हम यह सब करें और फिर कोई उतना ही बुरा नेता सत्ता में आ जाए।” यानी अमेरिका के पास भी इस जंग का कोई निश्चित “एंड प्लान” नहीं है।
“बहुत देर हो गई” — या बहुत जल्दी?
ट्रंप का यह बयान जितना आत्मविश्वास से भरा लगता है, उतने ही सवाल भी खड़े करता है। जब ओमान की मेज पर शांति तय होने वाली थी — उसी रात हमला हुआ। जब ईरान बात करना चाहता था — तब “देर हो गई” कह दिया गया। दुनिया के तमाम देश अब यही सोच रहे हैं कि इस जंग का अंत कहाँ होगा — और क्या सच में बहुत देर हो चुकी है, या अभी भी कोई रास्ता बाकी है?
