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Saif Ali Khan ने सुनाई Tiger Pataudi की वो दर्दनाक दास्तान “आँख गई, फिर भी 70 रन ठोके, यही थे मेरे पिता!”
Tiger Pataudi Memorial Lecture 2026 में Saif Ali Khan ने खोला राज़ — कैसे एक आँख से खेलकर Tiger ने लिखी क्रिकेट की सबसे बड़ी वापसी की कहानी
कुछ कहानियाँ सिर्फ इसलिए नहीं सुनाई जातीं कि वो दिल को छू लें — बल्कि इसलिए भी कि वो हमें याद दिलाएं कि इंसान की हिम्मत किस हद तक जा सकती है। ऐसी ही एक कहानी सुनाई बॉलीवुड अभिनेता Saif Ali Khan ने — अपने पिता, भारत के महान क्रिकेटर Mansoor Ali Khan Pataudi, जिन्हें दुनिया ‘Tiger Pataudi’ के नाम से जानती है, के बारे में।
मौका था Kolkata में आयोजित Tiger Pataudi Memorial Lecture 2026 का — और Saif ने जो बातें साझा कीं, वो सुनकर आँखें भर आईं।
वो हादसा जिसने क्रिकेट की दुनिया हिला दी
Saif ने बताया कि उनके पिता Tiger Pataudi की एक आँख तब गई जब वो अपने करियर के सबसे अहम मोड़ पर थे। एक ऐसा वक़्त जब कुछ बड़ा करने की तैयारी थी — उसी वक़्त किस्मत ने सबसे कठोर इम्तिहान लिया।
Saif ने कहा, “मेरे पिता ने अपनी आँख तब खोई जब वो बड़ी उपलब्धि की दहलीज़ पर खड़े थे। यह खेल इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक थी — और साथ ही, सबसे महान वापसी भी।”
पिता को खुद नहीं पता था — सोचा कंधे की चोट है
जो बात और भी चौंकाने वाली है वो यह है कि Tiger Pataudi को खुद शुरुआत में पता ही नहीं था कि उन्होंने अपनी आँख खो दी है। उन्हें लगा यह किसी कंधे की चोट का असर है।
Saif ने बताया, “डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया और कहा कि आँख में काँच का एक टुकड़ा है। 99% नज़र जाएगी। लेकिन एक उपाय था — Contact Lens। डॉक्टरों ने कहा कि अगर Lens पहना तो 90% नज़र वापस आ सकती है, लेकिन adjust होने में वक़्त लगेगा।”
इसी बीच University से वापस आकर Delhi में उन्हें एक English टीम के खिलाफ मैच खेलने का बुलावा आया।
Lens पहना, दो गेंदें दिखीं — और फिर भी 35 रन ठोके!
यह वो पल है जो Tiger Pataudi को महान बनाता है। उन्होंने Lens पहना, मैदान पर उतरे — लेकिन एक छोटी सी ‘समस्या’ थी: उन्हें दो गेंदें दिख रही थीं, कुछ इंच के फासले पर।
किसी भी बल्लेबाज़ के लिए यह nightmare होता। लेकिन Tiger Pataudi? उन्होंने लंच से पहले 35 रन बना डाले।
Saif ने आगे बताया, “लंच के बाद उन्होंने Lens उतार दिया, टोपी से आँख ढक ली — और फिर 70 रन और बनाए। और उन्हें India के लिए खेलने के लिए चुन लिया गया।”
यह सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। एक आँख से, बिना किसी शिकायत के, Tiger Pataudi ने वो कर दिखाया जो दो आँखों वाले नहीं कर पाते।
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“यह विकलांगता नहीं थी, बस एक तथ्य था” — Tiger का फलसफा
Saif ने बताया कि उनके पिता ने कभी भी अपनी आँख की कमज़ोरी को ‘handicap’ नहीं कहा, कभी ‘adversity’ नहीं माना। उनके शब्दों में, “यह बस एक चीज़ थी जिसे adjust करना था।”
“उन्होंने कहा कि उन्हें अपना खेल बदलना पड़ा। लेकिन उन्होंने इसे कभी अपनी कमज़ोरी नहीं बनने दिया। यही उन्हें परिभाषित करता था — उनका Composure, उनका संयम।”
यह वो सीख है जो किसी भी किताब में नहीं मिलती।
घर पर Tiger कभी बात नहीं करते थे अपनी उपलब्धियों की

Saif ने एक और पहलू साझा किया — घर का Tiger Pataudi। जिस इंसान ने एक आँख से भारत की कप्तानी की, वो घर पर कितने शांत और संयमी थे।
“घर पर वो कभी अपनी उपलब्धियों की बात नहीं करते थे। मेरी माँ Sharmila Tagore कभी-कभी खीझ जाती थीं — dinner पर कम जानकार लोग अपनी राय दे रहे होते, और वो चुप रहते। कहते, ‘किसी ने मुझसे पूछा नहीं।’ यह एक बिल्कुल अलग तरह का आत्मविश्वास था।”
यह सुनकर लगता है — असली ताकत वो होती है जो खुद को साबित करने की ज़रूरत नहीं समझती।
Tiger का जाना, एक युग का अंत
Tiger Pataudi का September 2011 में New Delhi में निधन हो गया था। उनके जाने से भारतीय क्रिकेट ने एक ऐसा अध्याय खो दिया जो फिर कभी नहीं लिखा जा सकेगा।
Saif Ali Khan फिलहाल काम के मोर्चे पर Netflix की फिल्म Kartavya में नज़र आए थे।
लेकिन आज वो सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे — वो एक बेटे थे, जो अपने पिता की विरासत को ज़िंदा रख रहे थे। और उन्होंने यह बखूबी किया।
