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पश्चिम एशिया युद्ध में Pakistan की नई भूमिका, लेकिन रास्ता आसान नहीं
अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश, सऊदी अरब से रिश्ते बन सकते हैं चुनौती
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान अचानक एक अहम कूटनीतिक भूमिका में नजर आ रहा है। Donald Trump जहां इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं, वहीं पाकिस्तान खुद को अमेरिका और Iran के बीच एक मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान इस मुश्किल भूमिका को निभा पाएगा? क्योंकि इसके रास्ते में कई “कूटनीतिक बारूदी सुरंगें” भी मौजूद हैं।
कैसे बढ़ी पाकिस्तान की भूमिका?
हाल के दिनों में पाकिस्तान ने तेजी से कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ाई हैं।
- Asim Munir ने सीधे डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की
- Shehbaz Sharif ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से संपर्क किया
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिका का 15-पॉइंट शांति प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाया
हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिससे यह साफ हो गया कि मामला आसान नहीं है।
क्यों है पाकिस्तान सही पोजिशन में?
पाकिस्तान के पास एक खास फायदा है—उसके रिश्ते दोनों पक्षों से हैं।
- अमेरिका के साथ लंबे समय से रणनीतिक संबंध
- ईरान के साथ भौगोलिक और राजनीतिक संपर्क
इसी वजह से पाकिस्तान को एक “ब्रिज” के रूप में देखा जा रहा है।
लेकिन सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या है उसका Saudi Arabia के साथ मजबूत रिश्ता।
सऊदी अरब और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव रहा है। ऐसे में अगर पाकिस्तान ईरान के करीब जाता है, तो सऊदी अरब नाराज हो सकता है।
यानी पाकिस्तान को एक साथ दोनों पक्षों को संतुलित करना होगा—जो कि बेहद मुश्किल काम है।

क्या पाकिस्तान बन सकता है ‘पीसमेकर’?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधे बातचीत उसके देश में हो सकती है।
अगर ऐसा होता है, तो यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत होगी।
लेकिन इसके लिए दोनों देशों का भरोसा जीतना जरूरी है—जो फिलहाल आसान नहीं दिख रहा।
वैश्विक राजनीति में नई चाल
यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि पाकिस्तान खुद को वैश्विक मंच पर एक अहम खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना चाहता है।
लेकिन पश्चिम एशिया की जटिल राजनीति में हर कदम बहुत सोच-समझकर उठाना पड़ता है।
आगे क्या?
अब नजरें इस बात पर हैं कि क्या अमेरिका और ईरान बातचीत के लिए तैयार होते हैं या नहीं।
अगर पाकिस्तान इस तनाव को कम करने में सफल होता है, तो उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि मजबूत हो सकती है।
लेकिन अगर संतुलन बिगड़ा, तो यह कदम उल्टा भी पड़ सकता है।
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