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Mexico ने भारत पर लगाया 50% तक टैरिफ झटका नई नीति से सबसे बड़ा नुकसान किसे होगा?

भारत से मेक्सिको को होने वाला अरबों डॉलर का निर्यात खतरे में, ऑटो सेक्टर पर सबसे बड़ा असर—कई कंपनियों की धड़कनें तेज।

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Mexico Tariffs on India: 50% तक टैरिफ से भारतीय ऑटो सेक्टर को बड़ा झटका | Dainik Diary
मेक्सिको के नए टैरिफ कानून से भारतीय ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर बढ़ा दबाव।

मेक्सिको ने 2026 की शुरुआत से ही भारत, चीन और उन देशों पर भारी टैरिफ लगाने का फैसला कर लिया है, जिनके साथ उसका औपचारिक व्यापारिक समझौता नहीं है। यह फैसला एक ऐसे समय पर आया है जब वैश्विक स्तर पर व्यापार युद्ध और आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा तेजी से बढ़ रहा है। मेक्सिको संसद द्वारा मंज़ूर इस नई टैरिफ नीति में 50% तक बढ़े हुए आयात शुल्क शामिल हैं—और इसका सबसे तगड़ा झटका भारत को लगने वाला है।

भारत को क्यों लगेगा सबसे बड़ा झटका?

मेक्सिको भारत का तीसरा सबसे बड़ा कार निर्यात बाजार है—साउथ अफ्रीका और सऊदी अरब के बाद। 2025 में ही भारत ने मेक्सिको को लगभग $5.63 बिलियन का निर्यात किया, जिसमें सिर्फ वाहन निर्यात का हिस्सा $1.86 बिलियन था। लेकिन नई नीति के बाद यह पूरा व्यापार मॉडल खतरे में है।

Mexico Tariffs on India: 50% तक टैरिफ से भारतीय ऑटो सेक्टर को बड़ा झटका | Dainik Diary


सबसे ज्यादा प्रभावित होगा भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग, जो लंबे समय से मेक्सिको को भारत में बने मॉडल बड़े पैमाने पर भेजता रहा है।

जैसी कंपनियां वहां की मार्केट में बेहद मजबूत पकड़ रखती हैं। स्कोडा ऑटो अकेले भारत से मेक्सिको भेजी जाने वाली कुल कारों का लगभग 50% निर्यात करती है।

स्कोडा ऑटो वोक्सवैगन इंडिया के प्रमुख पियूष अरोड़ा के अनुसार, “मेक्सिको हमारे लिए हमेशा एक मजबूत निर्यात बाजार रहा है। वहां हमारी भारत-निर्मित कारों की डिमांड लगातार बढ़ रही थी।” लेकिन अब 50% तक बढ़े शुल्क इस बढ़त को धीमा कर सकते हैं।

किन सेक्टरों पर पड़ेगा असर?

वाहनों के अलावा कई और भारतीय सेक्टरों पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा:

सेक्टरनिर्यात मूल्य (2025)
इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक उपकरण$612.38 मिलियन
मशीनरी, बॉयलर्स, न्यूक्लियर रिएक्टर$560.87 मिलियन
ऑर्गेनिक केमिकल्स$388.04 मिलियन
एल्युमिनियम$386.03 मिलियन
फ़ार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट्स$211.20 मिलियन

यानि सिर्फ ऑटो सेक्टर ही नहीं, बल्कि भारत के कई उद्योगों को अगले साल जनवरी से लागत बढ़ने और ऑर्डर घटने का खतरा है।

मेक्सिको यह कदम क्यों उठा रहा है?

मेक्सिको सरकार का कहना है कि यह कदम स्थानीय रोजगार और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम की सरकार चाहती है कि देश में विदेशी माल की एंट्री महंगी हो, ताकि लोकल इंडस्ट्री को बढ़ावा मिल सके।

Mexico Tariffs on India: 50% तक टैरिफ से भारतीय ऑटो सेक्टर को बड़ा झटका | Dainik Diary


हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होगी और भारत जैसे विश्वसनीय निर्यातक देशों के साथ रिश्तों में अनावश्यक तनाव पैदा हो सकता है।

भारतीय उद्योग समूहों की कोशिशें शुरू

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत की ऑटो इंडस्ट्री सक्रिय रूप से सरकार से बातचीत कर रही है ताकि मेक्सिको इस फैसले पर पुनर्विचार करे। कुछ कंपनियों की ओर से यह भी कहा गया है कि यदि टैरिफ लागू होता है तो भारतीय वाहनों की प्रतिस्पर्धात्मक कीमतें बढ़ जाएँगी और बाजार में चीन, ब्राज़ील जैसी कंपनियों को मौका मिल सकता है।

आगे का रास्ता क्या है?

भारत और मेक्सिको के बीच औपचारिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) नहीं है। ऐसे में भारत विकल्प तलाश सकता है—

  • या तो मेक्सिको के साथ नए व्यापार समझौते पर बात आगे बढ़े,
  • या उद्योगों को नए निर्यात बाज़ार तलाशने पड़ेंगे।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि यह फैसला भारत के ऑटो सेक्टर के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। सरकार और कंपनियां दोनों इस बदलाव के असर को कम करने की तैयारी में लग गई हैं।