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Bakrid 2026: Maharashtra से Asam तक सख्त हुए नियम, जानिए किस राज्य में क्या है पशु बलि का कानून
ईद-उल-अजहा से पहले कई राज्यों में प्रशासन अलर्ट मोड पर, कहीं पूर्ण प्रतिबंध तो कहीं सर्टिफिकेट के बाद ही मिल रही अनुमति
देशभर में Bakrid 2026 की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इस बार त्योहार के साथ-साथ पशु बलि को लेकर कानून और नियम भी चर्चा के केंद्र में हैं। महाराष्ट्र, असम, उत्तर प्रदेश, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों में प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है, जबकि कुछ राज्यों में सीमित अनुमति के साथ बलि की इजाजत दी जा रही है।
हर साल की तरह इस बार भी सवाल वही है — आखिर किस राज्य में क्या नियम लागू हैं और कौन-से जानवरों की कुर्बानी कानूनी रूप से मान्य है?
महाराष्ट्र में बढ़ी निगरानी
महाराष्ट्र सरकार ने Bakrid से पहले अवैध पशु परिवहन, गैरकानूनी बूचड़खानों और बीफ तस्करी पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। राज्य में पहले से लागू कानून के तहत गाय, बैल और बछड़ों की हत्या पूरी तरह प्रतिबंधित है।
मुंबई में BMC ने कुर्बानी के लिए तय स्थानों की सूची जारी की है। वहीं कुछ इलाकों में हाउसिंग सोसायटी और सार्वजनिक जगहों पर पशु बलि को लेकर विवाद भी सामने आए हैं। प्रशासन ने साफ कहा है कि नियम तोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी।
असम और यूपी में भी सख्त रवैया
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पहले ही साफ कर दिया है कि राज्य में गोवंश से जुड़ी गतिविधियों पर कानून का सख्ती से पालन कराया जाएगा। कई मुस्लिम संगठनों ने भी साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए गाय की कुर्बानी से बचने की अपील की है।
उत्तर प्रदेश, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों में पहले से ही कड़े एंटी-काउ स्लॉटर कानून लागू हैं। कुछ मामलों में आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। पुलिस ने सीमावर्ती इलाकों में चेकिंग बढ़ा दी है ताकि अवैध पशु परिवहन रोका जा सके।
बंगाल में कोर्ट तक पहुँचा मामला
पश्चिम बंगाल में इस बार सरकार ने निर्देश दिया है कि केवल वही पशु कुर्बानी के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं जिन्हें “फिट फॉर स्लॉटर” प्रमाणपत्र मिला हो। कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि “गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।”
इसके बाद राज्य में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
दक्षिण भारत में अलग-अलग नियम
कर्नाटक में सख्त कानून लागू हैं, जबकि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में कुछ शर्तों के साथ पशु बलि की अनुमति दी जाती है।
केरल इस मामले में सबसे अलग है, जहाँ गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है और बीफ खुले तौर पर कई समुदायों में खाया जाता है। वहाँ मुख्य रूप से नगर निगम और स्वास्थ्य नियम लागू होते हैं।
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उत्तर-पूर्व में अलग तस्वीर
मेघालय, नागालैंड और मिजोरम जैसे राज्यों में गोवंश पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। इन राज्यों में बीफ स्थानीय संस्कृति और खानपान का हिस्सा माना जाता है।
हालांकि मणिपुर में स्थिति मिश्रित है — घाटी वाले इलाकों में प्रतिबंध ज्यादा सख्त हैं, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में नियम अलग हैं।

मुस्लिम संगठनों की भी अपील
देशभर के कई मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों ने लोगों से अपील की है कि वे राज्य के कानूनों का पालन करें और सोशल मीडिया पर कुर्बानी की तस्वीरें शेयर करने से बचें।
जमीअत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने भी लोगों से शांति और संवेदनशीलता बनाए रखने की अपील की है।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी Bakrid से पहले देशभर में एंटी-काउ स्लॉटर कानूनों को और सख्ती से लागू करने की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।
त्योहार की तैयारियों के बीच प्रशासन की कोशिश यही है कि धार्मिक परंपराओं और कानून — दोनों के बीच संतुलन बना रहे और देशभर में शांति के साथ Bakrid मनाई जा सके।
