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Kim Jong Un की 13 साल की बेटी बनेगी उत्तर कोरिया की अगली तानाशाह? जो संकेत मिल रहे हैं वो चौंकाने वाले हैं
किम जू-ए को सरकारी मीडिया में “सम्मानित बच्ची” कहा जा रहा है, सेना के जनरल उनके कान में झुककर बात करते हैं — लेकिन क्या एक लड़की उस देश को चला सकती है जहाँ महिला टैक्सी यात्री को अपशकुन माना जाता है?
इतिहास में ऐसे कई मौके आए हैं जब किसी तानाशाह के उत्तराधिकारी को लेकर पूरी दुनिया अटकलें लगाती रही। सद्दाम हुसैन के बेटों उदय और कुसय को लेकर भी यही हुआ था — लेकिन उत्तर कोरिया का मामला इससे बिल्कुल अलग है। यहाँ उत्तराधिकारी एक 13 साल की लड़की हो सकती है।
किम जोंग-उन की बेटी किम जू-ए पिछले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन में आने लगी हैं। और अब दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी ने अपने सांसदों को यह जानकारी दी है कि किम जोंग-उन ने अपनी बेटी को अपना उत्तराधिकारी चुन लिया है — और वो नीतिगत मामलों में अपनी राय भी देने लगी हैं।
एक रहस्यमयी बच्ची जिसका नाम भी सरकारी तौर पर नहीं बताया गया
उत्तर कोरिया ने कभी आधिकारिक रूप से अपनी बेटी का नाम या उम्र सार्वजनिक नहीं की। दुनिया को पहली बार उनके बारे में तब पता चला जब अमेरिकी बास्केटबॉल स्टार डेनिस रॉडमैन ने 2013 में प्योंगयांग दौरे के बाद द गार्डियन को उनका नाम बताया। खुफिया रिपोर्ट्स के आधार पर उनकी उम्र अभी करीब 13 साल मानी जा रही है।
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वो पहली बार 2022 में सरकारी टीवी पर नज़र आईं — अपने पिता का हाथ थामे, उत्तर कोरिया की सबसे नई मिसाइल का निरीक्षण करते हुए। तब से अब तक वो कई बार सेना की परेड, हथियारों के परीक्षण और सैन्य समारोहों में किम के साथ दिखी हैं।
जनरल झुककर कान में बात करते हैं — यह कोई साधारण बच्ची नहीं
सेजोंग इंस्टीट्यूट के उत्तर कोरिया विशेषज्ञ चेओंग सेओंग-चांग कहते हैं कि सरकारी मीडिया जू-ए के लिए जो भाषा इस्तेमाल कर रहा है — “सम्मानित बच्ची” — वो शब्द आमतौर पर सिर्फ सर्वोच्च नेता के लिए आरक्षित होते हैं। यह अपने आप में एक बड़ा संकेत है।
और इससे भी बड़ी बात — सैन्य परेड के दौरान उत्तर कोरिया के शीर्ष जनरल उनके पास झुककर कान में फुसफुसाते हैं, जैसे किसी भावी कमांडर-इन-चीफ को ब्रीफ किया जाता है। वो अपने पिता जैसा ही काला लेदर कोट और गहरे रंग का चश्मा पहनती हैं।
यह देखकर दुनिया के किसी भी जानकार को याद आ सकता है कि जब किम जोंग-उन खुद 2010 में पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए थे — अपने पिता की मृत्यु से सिर्फ एक साल पहले। चेओंग का मानना है कि किम इस बार वैसी अचानक सत्ता-हस्तांतरण की गलती नहीं दोहराना चाहते — इसीलिए वो जू-ए को जल्दी से तैयार कर रहे हैं।
लेकिन एक बड़ा सवाल — क्या उत्तर कोरिया किसी महिला को नेता मान सकता है?
यहीं पर कहानी पेचीदा हो जाती है। 2019 में उत्तर कोरिया से भागकर आए पूर्व राजनयिक र्यू ह्यून-वू का कहना है कि उत्तर कोरिया की पितृसत्तात्मक व्यवस्था में एक महिला का नेता बनना लगभग असंभव है।
वो एक दिलचस्प उदाहरण देते हैं — प्योंगयांग में कई टैक्सी चालक किसी महिला को दिन की पहली सवारी के रूप में बिठाने से मना कर देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है यह अपशकुन है। और अगर किसी कारण बिठाना पड़ जाए तो वो सवारी उतारने के बाद गाड़ी के पीछे जाकर तीन बार थूकते हैं — ताकि बुरी किस्मत भाग जाए।
ऐसे समाज में एक महिला तानाशाह? र्यू कहते हैं इससे सेना में विद्रोह की भावना भी जन्म ले सकती है — जनरल सोच सकते हैं कि अगर एक लड़की नेता बन सकती है तो हम क्यों नहीं।

लेकिन 1990 के अकाल ने बदल दी उत्तर कोरिया में महिलाओं की स्थिति
दूसरी तरफ, शोधकर्ता सोंग ह्यून-जिन — जिन्होंने 120 से ज़्यादा उत्तर कोरियाई शरणार्थियों से बात की है — कहती हैं कि 1990 के दशक के भीषण अकाल के बाद से महिलाओं की स्थिति बहुत बदल गई है।
जब राज्य की अर्थव्यवस्था चरमरा गई और पुरुष सरकारी नौकरियों से चिपके रहे, तब महिलाओं ने परिवार चलाने के लिए काला बाज़ार, व्यापार और तस्करी का रास्ता अपनाया। आज उत्तर कोरियाई टीवी शो में पुरुषों को एप्रन पहने घर का काम करते दिखाया जाता है — जो कुछ साल पहले सोचा भी नहीं जा सकता था।
सोंग कहती हैं — “हम उत्तर कोरिया को अपनी सोच से नहीं समझ सकते। हमें उसे जोसियोन राजवंश की तरह सोचना होगा — शाही खून वाले को सिंहासन से कौन रोकेगा?”
किम की बहन भी निभा सकती हैं अहम भूमिका
विशेषज्ञ चेओंग का मानना है कि किम जोंग-उन अपनी शक्तिशाली बहन किम यो-जोंग को जू-ए की संरक्षक के रूप में तैयार कर रहे हैं। किम यो-जोंग को हाल ही में वर्कर्स पार्टी के जनरल अफेयर्स विभाग का निदेशक बनाया गया है — जो पार्टी के सभी विभागों की निगरानी करता है।
यह ठीक वैसा ही है जैसे मध्ययुगीन यूरोप में किसी नाबालिग राजा के लिए एक शक्तिशाली रीजेंट नियुक्त किया जाता था।
और अंत में — क्या यह सब किम का ध्यान खींचने का तरीका है?
र्यू ह्यून-वू एक और दिलचस्प नज़रिया रखते हैं। उनके अनुसार किम जोंग-उन इस पूरी चर्चा का आनंद ले रहे हैं। वो कहते हैं, “किम उतने बड़े अटेंशन-सीकर हैं जितना आप सोचते नहीं। उन्हें इन सारे लेखों से, अपने संभावित उत्तराधिकारी को लेकर चल रही बहस से खुशी होती है।”
सच जो भी हो — दुनिया की नज़रें अब उस 13 साल की लड़की पर हैं जो अपने पिता के साथ मिसाइलों का निरीक्षण करती है और जिसके कान में सेना के जनरल झुककर बात करते हैं।
