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सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: ₹1.2 लाख करोड़ के मेगा प्लान से भारत बनेगा चिप हब?
सरकार की बड़ी तैयारी, घरेलू उत्पादन बढ़ाकर 2030 तक आयात पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य
भारत अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। केंद्र सरकार जल्द ही India Semiconductor Mission 2.0 (ISM 2.0) लॉन्च कर सकती है, जिसके लिए ₹1 लाख करोड़ से ₹1.2 लाख करोड़ तक का भारी निवेश प्रस्तावित है।
यह नई योजना पहले चरण के मुकाबले कहीं ज्यादा विस्तृत और महत्वाकांक्षी मानी जा रही है। गौरतलब है कि पहले चरण के लिए करीब ₹76,000 करोड़ का बजट रखा गया था, जबकि ISM 2.0 का दायरा इससे काफी बड़ा होगा।
सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल इस योजना को लेकर विभिन्न मंत्रालयों के बीच चर्चा चल रही है। Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) और वित्त मंत्रालय के बीच अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया जारी है, जिसके बाद मई तक इसकी घोषणा संभव है।
इस बार सरकार सिर्फ चिप निर्माण (fabrication) और डिजाइन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने पर फोकस है। इसमें मशीनरी, कच्चा माल, गैस सप्लायर्स, स्पेशल केमिकल कंपनियां और MSMEs जैसे सपोर्ट सेक्टर को भी शामिल किया जाएगा।
वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में आई बाधाओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। इससे भारत को चिप उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल सकती है।
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इस मिशन का एक बड़ा हिस्सा होगा नया Design Linked Incentive Scheme (DLI 2.0), जिसके तहत विदेशी कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर रिसर्च और डेवलपमेंट करने की अनुमति दी जाएगी। इससे देश में 50 तक नई डीपटेक सेमीकंडक्टर डिजाइन कंपनियां उभरने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह योजना सफल होती है, तो भारत 2030 तक अपनी लगभग 75% घरेलू सेमीकंडक्टर जरूरतों को खुद पूरा कर सकता है। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत खिलाड़ी बन सकता है।
उदाहरण के तौर पर, आज स्मार्टफोन, कार, और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले चिप्स का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। ISM 2.0 के जरिए भारत इन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ाकर लागत और जोखिम दोनों कम कर सकता है।
कुल मिलाकर, यह मिशन न सिर्फ टेक्नोलॉजी सेक्टर को नई दिशा देगा, बल्कि रोजगार, निवेश और नवाचार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
