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भारत के स्मार्टफोन मार्केट में सुस्ती के बीच Google और Nothing की तेज़ रफ्तार बढ़त
जहाँ कुल शिपमेंट में गिरावट दर्ज हुई, वहीं प्रीमियम और ऑफलाइन रणनीति ने कुछ ब्रांड्स को दिलाई नई उड़ान
भारत का स्मार्टफोन बाजार इन दिनों एक अजीब मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ लगातार नए-नए स्मार्टफोन लॉन्च हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मांग में हल्की लेकिन साफ़ गिरावट देखने को मिल रही है। काउंटरपॉइंट रिसर्च की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में भारत के स्मार्टफोन शिपमेंट में 3% की सालाना गिरावट दर्ज की गई है। पिछले छह सालों में यह सबसे कमजोर Q1 माना जा रहा है।
लेकिन इस सुस्ती के बीच कुछ ब्रांड ऐसे भी हैं जो धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। खासकर Nothing और Google ने बाजार में अलग दिशा पकड़ ली है।
Nothing (जिसमें CMF ब्रांड भी शामिल है) ने इस तिमाही में 47% की सालाना बढ़त दर्ज की है और यह भारत का सबसे तेजी से बढ़ने वाला स्मार्टफोन ब्रांड बन गया है। इस तेज़ ग्रोथ के पीछे कंपनी की ऑफलाइन रणनीति को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। भारत में पहला एक्सक्लूसिव स्टोर खोलने के बाद ब्रांड की मौजूदगी और ग्राहकों तक पहुंच दोनों में सुधार हुआ है।
Nothing का फोकस सिर्फ बिक्री पर नहीं, बल्कि ब्रांड अनुभव पर भी रहा है। बेंगलुरु में लॉन्च हुए फ्लैगशिप स्टोर के दौरान कंपनी के को-फाउंडर Akis Evangelidis ने कहा था कि उनका मकसद सिर्फ फोन बेचना नहीं है, बल्कि यूज़र्स के साथ एक कम्युनिटी बनाना है, जहाँ लोग ब्रांड को समझ सकें और उससे जुड़ सकें।
इस रणनीति का असर अब साफ दिख रहा है। युवा उपभोक्ताओं के बीच Nothing के डिजाइन-फोकस्ड स्मार्टफोन खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। खासकर Phone 4a सीरीज़ ने शुरुआती बिक्री में अच्छी पकड़ बनाई है, जिसका कारण इसका अलग और बोल्ड डिज़ाइन माना जा रहा है—ऐसा डिज़ाइन जो भीड़ में अलग दिखता है, जैसे किसी साधारण टी-शर्ट के बीच एक अनोखी ग्राफिक जैकेट।

दूसरी तरफ, प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में Google ने भी चुपचाप अपनी जगह मजबूत कर ली है। Vivo, Samsung और Oppo जैसे दिग्गजों के बीच Google का Pixel ब्रांड अब भारत के प्रीमियम (45,000 से ऊपर) सेगमेंट में सबसे तेजी से बढ़ने वाला ब्रांड बन गया है।
इस बढ़त का बड़ा कारण सिर्फ हार्डवेयर नहीं है, बल्कि Google की AI-आधारित फीचर्स और लंबी सॉफ्टवेयर सपोर्ट रणनीति भी है। आज के यूज़र सिर्फ कैमरा या डिजाइन नहीं देख रहे, बल्कि फोन का “लाइफस्पैन” भी देख रहे हैं।
Google की Pixel Upgrade Programme ने इस सोच को और मजबूत किया है। इस योजना के तहत यूज़र कम मासिक EMI देकर (लगभग ₹3,333 से शुरू) Pixel फोन ले सकते हैं और कुछ समय बाद नए मॉडल में अपग्रेड कर सकते हैं, जिसमें पुराने फोन का तय buyback वैल्यू भी मिलता है। यह मॉडल काफी हद तक Apple की रणनीति जैसा है, जिसने लंबे समय से प्रीमियम बाजार में मजबूत पकड़ बनाई हुई है।
लेकिन सवाल यह है कि जब कुछ ब्रांड तेजी से बढ़ रहे हैं, तो पूरा स्मार्टफोन बाजार धीमा क्यों पड़ रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं। मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतें, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा में उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनाव (खासकर मिडिल ईस्ट क्षेत्र में) ने स्मार्टफोन की लागत बढ़ा दी है। इसका सबसे ज्यादा असर एंट्री-लेवल और मिड-रेंज सेगमेंट पर पड़ा है।
इसके अलावा, अब लोग अपने फोन को पहले की तुलना में ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं। बेहतर सॉफ्टवेयर अपडेट, मजबूत बिल्ड क्वालिटी और लंबी बैटरी लाइफ ने अपग्रेड साइकिल को धीमा कर दिया है। अब उपभोक्ता हर साल नया फोन लेने के बजाय 2–3 साल तक उसी डिवाइस को इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, भारत का स्मार्टफोन बाजार एक ट्रांज़िशन फेज में है। जहाँ एक तरफ समग्र मांग धीमी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ ब्रांड्स की रणनीति और प्रीमियम फोकस नए विजेताओं को जन्म दे रही है।
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