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भारत-ओमान व्यापार समझौता लागू: क्या Hormuz संकट के बीच भारत को मिल गया खाड़ी देशों तक नया सुरक्षित रास्ता?

भारत और ओमान के बीच CEPA समझौता हुआ प्रभावी, निर्यातकों, किसानों, MSMEs और ऊर्जा सुरक्षा के लिए खुल सकते हैं नए अवसर

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Dainik Diary Zaid 2026 06 01T165258.582
भारत और ओमान के बीच लागू हुआ CEPA समझौता, व्यापार और ऊर्जा सहयोग को नई दिशा देने की उम्मीद।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक व्यापार मार्गों पर मंडराते जोखिमों के बीच भारत और ओमान के बीच हुआ Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) अब आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। यह समझौता ऐसे समय में प्रभावी हुआ है जब Hormuz Strait के आसपास भू-राजनीतिक तनाव ने दुनिया भर के ऊर्जा और व्यापार बाजारों की चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापारिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी क्षेत्र तक पहुंच को भी मजबूत कर सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता?

पिछले कुछ समय से खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव के कारण Hormuz Strait से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है, क्योंकि वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

ऐसे माहौल में ओमान की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए एक बड़ा लाभ बनकर उभर रही है। ओमान के कई प्रमुख बंदरगाह सीधे Arabian Sea और Gulf of Oman से जुड़े हैं, जिससे वे Hormuz Strait पर निर्भर नहीं रहते।

यही वजह है कि संकट के समय भी ओमान व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अपेक्षाकृत स्थिर विकल्प प्रदान कर सकता है।

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भारत को क्या होगा फायदा?

नए CEPA समझौते के तहत ओमान ने भारत के अधिकांश उत्पादों को शून्य सीमा शुल्क (Zero Duty Access) देने का फैसला किया है।

इससे भारतीय निर्यातकों को कई क्षेत्रों में बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

इन क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • रत्न एवं आभूषण उद्योग
  • टेक्सटाइल और परिधान
  • चमड़ा और फुटवियर
  • कृषि उत्पाद
  • इंजीनियरिंग उत्पाद
  • फार्मास्यूटिकल्स
  • मेडिकल डिवाइस
  • ऑटोमोबाइल सेक्टर
  • प्लास्टिक और फर्नीचर उद्योग

पहले जहां कुछ उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगता था, अब उनके हटने से भारतीय सामान ओमान के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे।

MSMEs और किसानों के लिए नए अवसर

सरकार का मानना है कि इस समझौते का लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा।

छोटे और मध्यम उद्योग (MSMEs), कारीगर, महिला उद्यमी, किसान और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लोग भी नए निर्यात अवसरों का लाभ उठा सकते हैं।

उदाहरण के तौर पर भारतीय मसाले, चावल, हस्तशिल्प उत्पाद और टेक्सटाइल वस्त्र ओमान के बाजार में अपनी पहुंच बढ़ा सकते हैं।

ओमान भारत के लिए क्यों बन रहा है खास?

हाल के व्यापारिक आंकड़े बताते हैं कि खाड़ी क्षेत्र से भारत का आयात और निर्यात कई जगह प्रभावित हुआ, लेकिन ओमान इसके विपरीत एक मजबूत साझेदार के रूप में सामने आया।

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भारत का ओमान से आयात तेजी से बढ़ा है, खासकर:

  • कच्चा तेल
  • प्राकृतिक गैस
  • उर्वरक
  • मेथनॉल
  • अमोनिया

जैसे उत्पादों में।

ऊर्जा क्षेत्र में यह सहयोग भारत की दीर्घकालिक जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है।

ऊर्जा सुरक्षा को मिल सकती है मजबूती

भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में से एक है। ऐसे में तेल और गैस की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ओमान के साथ मजबूत व्यापारिक और ऊर्जा संबंध भारत को वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग उपलब्ध करा सकते हैं।

यदि भविष्य में Hormuz Strait के आसपास कोई बड़ा व्यवधान होता है, तो ओमान के बंदरगाह भारत के लिए एक भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकते हैं।

ओमान को क्या मिलेगा लाभ?

यह समझौता केवल भारत के लिए ही नहीं बल्कि ओमान के लिए भी फायदेमंद माना जा रहा है।

भारत ने भी कई उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने या हटाने की सहमति दी है। इससे ओमान के ऊर्जा, उर्वरक और औद्योगिक कच्चे माल से जुड़े निर्यातकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

ओमान पहले से ही भारत को बड़ी मात्रा में:

  • कच्चा तेल
  • LNG (Liquefied Natural Gas)
  • उर्वरक
  • मेथनॉल
  • अमोनिया

की आपूर्ति करता है।

बदलते वैश्विक माहौल में रणनीतिक साझेदारी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

जब दुनिया के कई हिस्सों में सप्लाई चेन बाधित हो रही है, तब भारत ऐसे साझेदार देशों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है जो व्यापार और ऊर्जा दोनों मोर्चों पर भरोसेमंद साबित हो सकते हैं।

ओमान के साथ यह नई साझेदारी आने वाले वर्षों में भारत की खाड़ी नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकती है।

निष्कर्ष

भारत-ओमान CEPA ऐसे समय में लागू हुआ है जब वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार अनिश्चितताओं से गुजर रहे हैं। यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत कर सकता है। यदि दोनों देश इस साझेदारी को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाते हैं, तो यह आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिणाम दे सकता है।