Stock Market
gold, silver पर बढ़ सकता है दबाव, Fed मीटिंग और US-ईरान वार्ता पर टिकी बाजार की नजर
वैश्विक संकेतों और डॉलर की मजबूती से गिर सकते हैं दाम, निवेशकों के लिए अहम हफ्ता
त्योहारों के बीच छोटा कारोबारी हफ्ता होने के बावजूद इस बार सोना-चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव तेज रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है।
इसका मुख्य कारण है Federal Reserve की अहम बैठक और United States व Iran के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत, जो वैश्विक बाजार की दिशा तय कर सकती है।
क्यों बढ़ा दबाव?
विश्लेषकों के अनुसार, निवेशक इस समय कई बड़े फैक्टर्स पर नजर बनाए हुए हैं—
- Fed की ब्याज दर नीति
- US-ईरान शांति वार्ता
- कच्चे तेल की कीमतें
- डॉलर की मजबूती
अगर इन सभी संकेतों में स्थिरता आती है, तो सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है।
हाल में कैसी रही कीमतों की चाल?
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले हफ्ते सोना करीब 1.23% गिरकर 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं चांदी में और ज्यादा गिरावट देखने को मिली और यह करीब 4.9% टूटकर 2.44 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही ट्रेंड देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे।
डॉलर और बॉन्ड यील्ड का असर
जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है और बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक सोने जैसे सुरक्षित निवेश (safe haven) से दूरी बनाने लगते हैं। हाल के मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने डॉलर को मजबूती दी है, जिसका सीधा असर सोने-चांदी पर पड़ा है।
कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता
इस बीच, हॉर्मुज़ क्षेत्र में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा है, जो आगे चलकर ब्याज दरों के फैसलों को प्रभावित कर सकता है।

आगे क्या उम्मीद?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोना निचले स्तरों पर कुछ सपोर्ट जरूर ले सकता है, लेकिन अगर डॉलर मजबूत बना रहता है और वैश्विक तनाव कम होता है, तो कीमतों में और गिरावट संभव है।
वहीं, चांदी ज्यादा अस्थिर रह सकती है, क्योंकि यह न सिर्फ कीमती धातु है बल्कि औद्योगिक उपयोग में भी आती है—इसलिए इसकी कीमतें दोहरी वजहों से प्रभावित होती हैं।
निवेशकों के लिए सलाह
ऐसे समय में निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए और वैश्विक संकेतों पर नजर रखते हुए ही कोई बड़ा फैसला लेना चाहिए।
